नारायणपुर: प्रखंड क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। केंद्रों की छुट्टी ऐसे समय हो रही है जब धूप और गर्मी अपने चरम पर होती है। ऐसे में कई मासूम बच्चों को तपती सड़कों पर नंगे पैर चलकर घर लौटना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
धूप की तपिश में घर लौटते दिखे बच्चे
गुरुवार को नगरपारा पूरब पंचायत स्थित भ्रमरपुर दुर्गा मंदिर परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से छुट्टी के बाद कई बच्चे तेज धूप में घर जाते दिखाई दिए। कुछ बच्चों को लेने उनके अभिभावक पहुंचे थे, लेकिन अधिकांश बच्चे बिना चप्पल-जूते के ही पैदल घर लौटते नजर आए। चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम में उनका सफर काफी मुश्किल भरा दिखा।
छुट्टी का समय बना परेशानी की वजह
वर्तमान में ग्रीष्मकालीन सत्र के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा मौसम में यह समय बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है। दोपहर के करीब तापमान तेजी से बढ़ जाता है और छुट्टी के समय बच्चों को सबसे अधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है।

समय में बदलाव की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छोटे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी को देखते हुए छुट्टी का समय और पहले किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को तेज धूप में घर नहीं लौटना पड़े।
सेविका ने बताया विभागीय निर्देशों का पालन
आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-33 की सेविका रंजीता गोस्वामी ने बताया कि केंद्र का संचालन विभाग द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छुट्टी के समय अभिभावकों को सूचना दी जाती है। कई बार वह स्वयं और सहायिका बच्चों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने का प्रयास भी करती हैं।
पूरे प्रखंड में एक जैसी स्थिति
ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या केवल एक केंद्र की नहीं है, बल्कि नारायणपुर प्रखंड के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को इसी तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच छोटे-छोटे बच्चे रोजाना धूप में घर लौटने को मजबूर हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ते तापमान के बीच बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान नौनिहालों को राहत मिल सके और उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

