भागलपुर में पटना उच्य न्यायालय की एक स्थायी खंडपीठ की स्थापना हो : सांसद

भागलपुर : आज दिनाक: 10 मार्च 2017 को युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद शैलेश कुमार उर्फ़ बुलो मंडल ने लोकसभा में दो मुद्दे को उठाया पहला बिहार राज्य के पूर्वी भाग के करीब एक दर्जन से भी ज्यादा जिलो में बोले जाने वाली भाषा अंगिका मुख्य रूप से प्राचीन अंग यानि भारत के उत्तर-पूर्वी एवं दक्षिण, बिहार, बंगाल, आसाम, उड़ीसा और नेपाल के तराई के इलाको में बोली जाने वाली भाषा है।अंगिका भारतीय आर्य भाषा है इस भाषा को देश तथा विदेश के करोड़ो लोगो द्वारा सामान्य बोलचाल में प्रयोग के अलावा पढने लिखने के साथ ही पत्र व्यवहार में भी अंगिका भाषा का प्रयोग किया जाता है इस भाषा का प्रयोग होने वाले क्षेत्र को अंग क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है अंग क्षेत्र के भाषा अंगिका से करोड़ो लोगो की भावनाएं भी जुडी हुई है क्योकि इस भाषा का ऐतिहासिक महत्व है।
श्री सांसद ने सदन में इस उद्दो को उठाते हुए सरकार से मांग किया है कि अंगिका भाषा के ऐतिहासिक तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए भारतीय संविधान की आंठवी अनुसूची में शामिल किया जाय जिससे भारत के विभिन्न भाषाओ के संस्कृति से देश वासियों को परिचित होने का गर्व प्राप्त हो सके ।
दूसरी मुद्दा भागलपुर में पटना उच्य न्यायालय की एक स्थायी खंडपीठ की स्थापना किये जाने की मांग को सदन में उठाते हुए सांसद शैलेश कुमार उर्फ़ बुलो मंडल ने कहा कि बिहार राज्य के पूर्वी सीमा पर स्थित भागलपुर जिला बिहार राज्य के राजधानी पटना से 250 किलोमीटर की दुरी पर है.जहाँ से आम नागरिको को उच्य न्यायलय से न्याय के लिए लम्बी दुरी तय करके आना जाना पड़ता है जिससे समय के साथ साथ धन की भी हानि होती है। भागलपुर जिले के आस पास जिला बांका सहरसा कटिहार मधेपुरा पूर्णिया सुपौल सहित कई जिला के लोगो को उच्य न्यायलय से न्याय के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही न्याय में विलम्ब होने से लोगो में निराशा बढती जा रही है इस क्षेत्र के आम नागरिको की यह बहुत पुरानी मांग है कि भागलपुर में पटना उच्य न्यायालय की एक स्थाई खंडपीठ की स्थापना की जाय। सांसद ने भारत सरकार से सदन के माध्यम से जनहित में आम नागरिको द्वारा की जा रही मांग को देखते हुए पटना उच्य न्यायालय की स्थायी खंडपीठ की स्थापना भागलपुर में करने की समुचित करवाई की जाय जिससे इस क्षेत्र के लोगो को दुलभ न्याय की व्यवस्था उपलब्ध हो सके ।


