भागलपुर। सर्दियों की आहट के साथ ही भागलपुर जिले के जलाशयों और आर्द्रभूमियों में प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है। हर साल की तरह इस बार भी अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। शुरुआती दौर में कुछ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। नवंबर और दिसंबर तक इनकी संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जिले की जगतपुर झील, इस्लामपुर, डिमाहा दियारा और बिहपुर समेत कई जलक्षेत्र सर्दियों में इन पक्षियों के प्रमुख ठिकाने बनते हैं।
Total Downloads: 433
ठंड बढ़ने के साथ ही दूर-दराज के इलाकों से पक्षी अनुकूल वातावरण और भोजन की तलाश में भागलपुर पहुंचते हैं। यहां की झीलों, नदियों और आर्द्रभूमियों में उपलब्ध मछलियां, जलीय जीव तथा अन्य खाद्य संसाधन इनके लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराते हैं। इन जलक्षेत्रों में हर साल अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी देखने को मिलती है, जिससे जिले की जैव विविधता का महत्व भी सामने आता है।
सुंदरवन में दिखा हिमालय में पाया जाने वाला पक्षी

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की टीम के अभिलाष कुमार ने बताया कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। अभी भागलपुर के सुंदरवन परिसर स्थित वन विभाग के क्षेत्र में हिमालय में पाया जाने वाला ब्लू कोटेड फ्लाईकैचर पक्षी दिखाई दिया है। इसके अलावा जगतपुर झील क्षेत्र में भी चार प्रवासी पक्षी नजर आए हैं। आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट के साथ जिले के विभिन्न जलक्षेत्रों में पक्षियों की मौजूदगी बढ़ने की उम्मीद है।
सर्दियों के दौरान ब्लू कोटेड फ्लाईकैचर जैसे पक्षियों की मौजूदगी पक्षी प्रेमियों और वन्यजीवों के अध्ययन से जुड़े लोगों के लिए खास महत्व रखती है। इनके आगमन से जिले के प्राकृतिक आवासों और मौसमी प्रवास की गतिविधियों को समझने का अवसर मिलता है।
जलक्षेत्रों में होगा सर्वेक्षण, प्रजातियों की पहचान करेगी टीम
प्रवासी पक्षियों के आगमन को देखते हुए बीएनएचएस की टीम जिले के विभिन्न जलक्षेत्रों का सर्वेक्षण करेगी। सर्वेक्षण के दौरान पक्षियों की संख्या का आकलन करने के साथ उनकी प्रजातियों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रिपोर्ट से पता चलेगा कि इस वर्ष भागलपुर जिले के जलक्षेत्रों में कितनी प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं और उनकी अनुमानित संख्या कितनी है। साथ ही पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करने पर पक्षियों की विविधता और उनके प्रवास के रुझानों को समझने में भी मदद मिल सकती है।
प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां
प्रवासी पक्षियों के लिए झीलें, दियारा क्षेत्र और अन्य आर्द्रभूमियां महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास हैं। ये क्षेत्र पक्षियों को भोजन, विश्राम और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में जलक्षेत्रों का संरक्षण और पक्षियों की नियमित निगरानी जरूरी है।
सर्वेक्षण से मिलने वाले आंकड़े न केवल प्रवासी पक्षियों की संख्या और विविधता का आकलन करने में सहायक होंगे, बल्कि आर्द्रभूमियों के संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित करेंगे। सर्दियों के अगले कुछ महीनों में भागलपुर के जलक्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी पर पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।
