स्नेह, सौहार्द का प्रतीक भैया दूज दीपोत्सव के अंतिम दिन यानी सोमवार को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा उपरांत द्वितीया को अनुराधा नक्षत्र में मनाया जाएगा। बहनें व्रत, पूजा, कथा आदि कर भाई की लंबी उम्र की कामना करेंगी। उनके माथे पर तिलक लगाएंगी। इसके बदले भाई भी उनकी रक्षा का संकल्प लेते हुए उपहार देते हैं। यह त्योहार रक्षाबंधन की तरह ही महत्व रखता है। सोमवार की सुबह 8 :52 बजे तक राहुकाल रहेगा तथा द्वितीया तिथि की शुरुआत 09:11 बजे से हो रही है, इसीलिए बहनें इसके बाद पूजा या भाई को टीका लगाएंगी।

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भाई की सलामती को रखेंगी व्रत

भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि सोमवार को जहां बहनें अपने भाई के लिए भाई दूज का पर्व मनाएंगी, वहीं कायस्थ समुदाय के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि विधान से मनाएंगे। इस दिन यमुना नदी में स्नान कर श्रद्धालु यम का तर्पण एवं गोवर्धन देव की पूजन करेंगे। पंडित झा ने स्कन्द पुराण का हवाला देते हुए कहा कि इस दिन भाई को बहन के घर भोजन करना और उन्हेंं उपहार देने अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से यम के दुष्प्रभाव भी कम हो जाता है।

चौमुखी दीपक से दूर होंगे यमराज

पंडित झा ने कहा कि बहन सायंकाल गोधूलि बेला में यमराज के नाम से चौमुखी दीया जलाकर घर के बाहर रखती है जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है। इससे मान्यता है कि भाई के प्राण की रक्षा होती है। भाई का चतुॢदक विकास होता है। दैहिक, दैविक और भौतिक संतापों से भाई की सुरक्षा होती है। दीपक प्रकाश देते हुए सभी प्रकार के तम को दूर करता है। इस प्रकार यह पर्व बहुत ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है। भाई बहन का यह पर्व दीपों के पर्व का उपसंहार है।

भाई दूज पूजन का शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:13 से 11:56 बजे तक

गुली काल मुहूर्त : दोपहर 12:56 से 02:17 बजे तक

शुभ मुहूर्त: मध्य काल 12:56 से शाम 03:06 बजे तक

By न्यूज़ डेस्क

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