कहते हैं कि आंखें शख्सियत का आईना होती हैं। बिना बोले आंखें बहुत कुछ कह देती हैं। दुर्गा मां की हर मूर्ति में उनकी आंखे चार चांद लगाती हैं और भक्तों को अपने रूप के बारे में बहुत कुछ कह देती हैं। शहर में बन रही दुर्गा प्रतिमाओं में भक्त उनकी आंखों को निहार कर महसूस कर सकते हैं कि मां रौद्र रूप में हैं, मोहिनी रूप में हैं या भक्तों पर अपना प्यार, दुलार और ममता बरसा रही हैं। आखिरकार आंखों की यह भाषा सिर्फ इंसान ही नहीं बोलते बल्कि मिट्टी से तैयार मूरत भी आंखों से बहुत कुछ कह जाती हैं। पूजा पंडालों में प्रतिमाओं का निर्माण जोरों पर है। इनमें आंखों की सजावट सबसे खास होती है। अब तक 1600 प्रतिमा बना चुके कलाकार रंजीत अब आंखों में चांर चांद लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सुदामा पंडित भी कारीगरी दिखा रहे हैं। बंगाल के कलाकार भी आंखें बनाने मेंं पीछे नहीं हैं।


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मुझे प्रकृति कीे हर छोटी-बड़ी चीज में मां का रूप दिखता है

मां दुर्गा की प्रतिमा को जितनी बार बारीकी से बनाया जाए निखार बढ़ता ही जाएगा। मैं हर वर्ष प्रतिभा को और सुंदर बनाने की कोशिश करता हूं। मां दुर्गा की प्रतिमा कैसे बेहतर बने उसमें निखार कैसे लाया जाए, इसके लिए हमेशा चिंतित रहता हूं। मूर्ति में कभी मुस्कुराहट झलकती है तो कभी आत्मविश्वास से भरी साहसी महिला दिखती है। मुझे प्रकृति के हर छोटी-बड़ी चीज में मां का रूप दिखता है। उन्हीं की भावनाओं को समेट कर मैं उनका रूप तैयार करता हूं। ये कहते हैं हुए रंजीत पंडित मां दुर्गा की प्रतिमाओं की ओर निहारते हैं और उसे टकटकी लगाए हुए देखते हैं। अलीगंज के अम्बई निवासी रंजीत पंडित पिछले 42 वर्षेां से मां दुर्गा की लगभग 1600 से अधिक प्रतिमाएं बना चुके हैं। इस वर्ष भी शहर में 12 जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा बना रहे हैं। मूर्ति तैयार करने में पंद्रह दिन लग जाते हैं।

मां की प्रतिमा में आंख बनाते अंबई के मूर्तिकार रंजीत पंडित।

दुर्गा का चेहरा कहीं गोरा तो कहीं गुलाबी रंग में दिखेगा

शहर में इस बार अधिकतर मूर्तियों के फेस गोरा, पिंक और गेहुंआ रंग में दिखेंगे। मोहद्दीनगर दुर्गामंदिर की प्रतिमा गोरी है तो मुंदीचक गढ़ैया की मूर्ति गुलाबी रंग में दिखेगी। कहीं का मूर्ति सौम्य रूप में है तो कहीं की तनी आंखें मां की प्रतिमा में नजर आएंगी। अलीगंज, डिक्शन रोड, मुंदीचक गढ़ैया, मोहद्दीनगर, नाथनगर पासी टोला की प्रतिमा में मां दुर्गा की आंखें तनी हुई दिखाई देगी। जबकि इशाकचक, लाजपतपार्क, स्टेशन पार्सल ऑफिस,जोगसर ग्वाला टाेला, गोशाला की मां दुर्गा की प्रतिमा सौम्य मुद्रा में होंगी।

मूर्तियों में आंखों का एक्सप्रेशन है खास

हड़ियापट्‌टी में 1990 से मूर्ति बना रहे सुदामा पंडित ने बताया कि इस बार उन्होंने चार प्रतिमाओं को तैयार किया है। इनमें कंपनीबाग, हड़ियापट्‌टी, बड़ी पोस्ट ऑफिस, नाथनगर गोसाईं टोला आदि जगहों पर मूर्तियां बिठाई जाएगी। दुर्गा मां को क्या रूप देना है यह आंखों का एक्सप्रेशन ही तय करता है। आंखों की कारीगरी सबसे खास है। आंखों से ही चेहरों के भाव स्पष्ट हो जाते हैं। सौम्य, शांत, क्रोध, खुशी आदि भाव आंखों में बखूबी झलकते हैं।

यह भी जानना जरूरी है

परवल के आकार की खिंची और लंबी होती हैं बांग्ला आंखें, मन को करती है मोहित

रौद्र आंखें : ये लालिमा लिए होती हैं। पुतलियां काफी बड़ी होती हैं। उन्हें एकदम खुला हुआ बनाया जाता है। पलकों की एक-एक लाइन को ऊपर की ओर मिलाया जाता है। कुछ आंखों को महिषासुर की ओर देखते हुए बनाया जाता है और कुछ को भक्तों की ओर।

शांति और सौम्य आंखें : ये येलो और ग्रीन कलर की होती हैं। मूर्तियों में यह सबसे ज्यादा कॉमन आंखें होती हैं। कलाकारों का मानना है कि सबसे आसानी से इन्हीं आंखों को बनाया जाता है।

मंदाकिनी या मीनाक्षी आंखें : इन्हें बनाने में वक्त लगता है। ये गुलाबी और हल्का नीली होती हैं। इसमें मां के पावन रूप को और खूबसूरत बनाने वाली इन आंखों को ज्यादातर कोलकाता की मूर्तियों में देखने को मिलता है। यह कमल की पंखुड़ी के जैसी होती हैं।

बांग्ला आंखें : परवल के आकार की खिंची हुई लंबी होती हैं। सबसे ज्यादा डिमांड में इन्हीं आंखों की रहती हैं। मोटी-मोटी ब्लैक आउट लाइन इन आंखों को परवल का रूप दे देती हैं।

आंखें बनाने में बंगाल के कारीगरों की अलग पहचान

मां दुर्गा की प्रतिमाओं पर मंदाकिनी, मीनाक्षी, परवल के आकार की आंखें, बुद्ध नयना, आर्टिस्टिक, बांग्ला आदि शैली की आंखें तैयार की जाती हैं। आंखों के माध्यम से मूर्तिकार चेहरे की भाव भंगिमाओं को शांत या सौम्य या क्रोधित या फिर गम्भीर बना देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण आंख की पुतली होती है। शहर में जितने भी पंडाल हैं, अलग-अलग मूर्तियां हैं और हर किसी की अलग आंखें। हालांकि इन आंखों को बनाने के लिए बंगाल के कारीगरों की अलग पहचान है। बांग्ला शैली की मूर्तियों में सौम्य व आर्ट में रौद्र आंखें रहती हैं। आंखों पर ही मूर्ति डिपेंड करती है।

By न्यूज़ डेस्क

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