31 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र शनि का नक्षत्र है, इसलिए इसके स्वामी शनि देव हैं। बुधवार को सूर्योदय के पहले से लेकर गुरुवार को सूर्योदय के पहले तक खरीदारी का योग है। इस दिन यहो अष्टमी है। यहो अष्टमी में चंद्रमा की पूजा होती है। बुधवार दिन होने से पुष्य नक्षत्र शुभ हो जाता है, क्योंकि चंद्रमा और बुध पिता-पुत्र हैं। पुष्य नक्षत्र में विवाह छोड़कर सभी शुभ कार्य किए जाते हैं। यह सभी तरह के सिद्ध का नक्षत्र है। इस दिन खरीदने, बेचने और भूमि पूजन शुभ माना जाता है। पुष्य का अर्थ होता है पोषण, ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाला।
इस नक्षत्र को शुभ और कल्याणकारी माना गया है, जो शुभ-सुंदर, सुख और संपदा देने वाला है। यह 27 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र है और 12 राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। पुष्य नक्षत्र के सभी चरणों के दौरान ही चंद्रमा अन्य किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए पुष्य नक्षत्र को सुख-शांति और धन-संपत्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा है। ऋगवेद में पुष्य नक्षत्र को मंगलकर्ता भी कहा गया है। इसके अलावा यह समृद्धिदायक, शुभ फल प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है।

पुष्य नक्षत्र में अक्षय धातु सोने की खरीदारी शुभ होती है।
खरीदारी के लिए विशेष क्यों
पुष्य नक्षत्र खरीदारी के लिए विशेष मुहूर्त इसलिए है, क्योंकि यह नक्षत्र स्थायी माना जाता है और इस मुहूर्त में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी और अक्षय होती है। इसलिए लोग इस शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं।
अति शुभ
इस बार अमृत सिद्धि और वैदूर्य योग के कारण इसे अति शुभ माना जा रहा है। अमृत सिद्धि योग सुबह 9 बजे से अपराह्न एक बजे तक जारी रहेगा। जबकि, वैदूर्य योग 2.14 बजे से शुरू होकर 4.49 तक चलेगा।
राशि के अनुसार लाभ
सोने की खरीदारी का अधिक महत्व है
पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदारी का अधिक महत्व है। लोग इस दिन सोने इसलिए खरीदते हैं, क्योंकि इसे शुद्ध, पवित्र और अक्षय धातु के रूप में माना जाता है। यह नक्षत्र स्वास्थ्य के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पुष्य नक्षत्र पर शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर यह सेहत संबंधी कई समस्याओं को समाप्त करने में सक्षम होता है।
वृष व तुला : चांदी या सफेद वस्तु या अल्मुनियम का सामान लें।
मिथुन व कन्या : सोना या किसी प्रकार का भोज्य पदार्थ बनाने वालीसा मग्री लें। फ्रीज़ या बर्तन लें।
कर्क : चांदी या गिलट का बना सामग्री लें। गणेश मूर्ति भी लें।
सिंह : तांबे की सामग्री। सोना या बेड ले सकते हैं।
धनु व मीन : आप सोना या कोई इलेक्ट्रिक सामग्री ले सकते हैं।
मकर व कुम्भ : लोहा या वाहन ले सकते हैं।
पुष्य नक्षत्र इसलिए महान होता है
आचार्य प्रणव मिश्रा ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति देव माने गए हैं और शनि को इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि माना जाता है। चूंकि बृहस्पति शुभता, बुद्धिमत्ता और ज्ञान के प्रतीक हैं और स्थायित्व का, इसलिए इन दोनों का योग मिलकर पुष्य नक्षत्र को शुभ बना देता है


