अपराधियों और नक्सलियों के बाद अब झारखंड के कोयला माफिया को भी मुंगेर के हथियार तस्करों के द्वारा एके 47 उपलब्ध कराने की बात सामने आ रही है। मुंगेर पुलिस झारखंड के रामगढ़ से एके 47 मामले में मोनाजिर को गिरफ्तार कर लायी है।
मोनाजिर एके 47 मामले में फरार मंजर उर्फ मंजी का साला है। सूत्रों की मानें तो मंजीत झारखंड में कोल ट्रेडिंग करता है और मोनाजिर उसका पाटर्नर है। दोनों झारखंड के कोयला माफिया को एके 47 उपलब्ध कराता था। मोनाजिर से पूछताछ से एके 47 से जुड़े कई अहम सुराग पुलिस को मिलने की उम्मीद की जा रही है। सूत्रों की मानें तो कोल क्षेत्र के माफियाओं को मुंगेर के हथियार तस्करों के द्वारा एके 47 उपलब्ध कराया जाता था। एसपी बाबू राम ने बताया कि एके 47 मामले में मोनाजिर से पूछताछ की जा रही है। मोनाजिर और मंजीत के द्वारा कोयला माफिया को एके 47 उपलब्ध कराये जाने पर एसपी ने कहा कि सारे बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
पुलिस को मंजीत की तलाश
एके 47 की एक महत्वपूर्ण कड़ी मंजीत को माना जा रहा है। जबलपुर से लाये गये एके 47 को मुख्य रूप से वहीं बिहार, झारखंड एवं दूसरे राज्यों के अपराधियों, कोयला माफिया व अंडरवर्ल्ड सरगना तक पहुंचाता था। मोनाजिर को रामगढ़ से गिरफ्तार कर मुंगेर लाये जाने के बाद माना जा रहा है कि मंजीत तक पुलिस जल्द पहुंच जाएगी या मंजीत इरफान की तरह ही कोर्ट में सरेंडर कर सकता है।

इरफान से पुलिस कर रही पूछताछ
एके 47 मामले में रिमांड पर लिये गये इरफान से पुलिस पूछताछ कर रही है। गुरुवार को कोर्ट में सरेंडर करने के बाद पुलिस ने इरफान को चार दिनों के लिये रिमांड पर ले लिया था। इरफान से भी एके 47 से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद की जा रही है। अभी तक के पूछताछ में पुलिस को उससे कोई खास जानकारी नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि इरफान ने कई राज उगले हैं, जिसे पुलिस गुप्त रख रही है।
मुंगेर के बरदह गांव से अबतक 20 एके-47 बरामद
मुंगेर के बरदह गांव से अबतक 20 एके-47 के साथ ही 35 मैगजीन व इसके स्पेयर पार्ट्स बरामद हो चुके हैं। एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें सेना का एक जवान रियाजुल रहमान भी है। जबलपुर में भी सेंट्रल ओर्डिनेंस डिपो के रिटायर आर्मोरर पुरुषोत्तम व स्टोर कीपर सुरेश ठाकुर की गिरफ्तारी हो चुकी है। खराब एके-47 स्टोर कीपर सुरेश ठाकुर की मिलीभगत से निकाली जाती थी। सूत्रों की मानें तो खराब एके-47 व मैगजीन अलग-अलग रखा जाता था। मैगजीन चोरी में इसकी संलिप्तता थी, इसकी भी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही असली वजह सामने आएगी।

तलाशे जा रहे हैं आतंकी कनेक्शन
सेंट्रल ओर्डिनेंस डिपो जबलपुर से चोरी कर मुंगेर के हथियार माफिया से बेचे गये एके 47 की जांच का दायरा दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। अपराधियों व नक्सलियों के साथ ही आतंकियों को भी उपलब्ध कराने की बात सामने आ रही है। 2012 के बाद से हुए आतंकी हमले में प्रयोग किये गये एके 47 के तार मुंगेर के हथियार माफिया से जुड़े होने से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। 2 जून 2016 को ढ़ाका में हुए आतंकी हमले में एके 47 का प्रयोग किया गया था। जांच में आतंकियों को मुंगेर से एके 47 उपलब्ध कराने की बात सामने आयी थी। लेकिन उस समय इसे हल्के में लिया गया। लेकिन अब जब सेंट्रल ओर्डिंनेंस डिपो जबलपुर से चोरी कर एके 47 बेचे जाने की बात सामने आने पर आतंकियों को भी हथियार उपलब्ध कराने की आशंका को बल मिला है। इसी तरह बिहार व झारखंड में हुए वारदात में प्रयोग किये गये एके 47 अपराधियों को मुंगेर से उपलब्ध कराने की जांच चल रही है।

एके-47 के सही आंकड़े जुटा रहीं सुरक्षा एजेंसिया
70-80 एके 47 बेचने वाला जबलपुर का आर्मोरर पुरुषोत्तम रजक सेन्ट्रल ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया से सेवानिवृत्त हुआ। इसी फैक्ट्री में खराब एके 47 को रिपोयर किया जाता है व बेकार एके-47 को गलाया भी जाता है। 2012 से 2018 तक सीनियर स्टोर कीपर सुरेश ठाकुर द्वारा वर्ष आर्मोरर पुरुषोत्तम को सिर्फ 70-80 एके-47 देने की बात पर सुरक्षा एजेंसियां के साथ जबलपुर एवं मुंगेर पुलिस को यकीन नहीं हो रहा है।
इस मामले में सीओडी के सिविलियन अधिकारी, आईबी, सेना व इंटेलिजेंस की टीम पुरुषोत्तम एवं सुरेश ठाकुर से गहन पूछताछ कर वास्तविक आंकड़े को पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर मुंगेर पुलिस जबलपुर से उन अभियुक्तों को ट्रंजिट रिमांड पर लेकर मूल खरीदार व तीन-तीन एके-47 के साथ गिरफ्तार इमरान व शमशेर आलम तथा सूत्रधार उसका बड़ा भाई भाई आर्मी में पदस्थापित नियाजुल रहमान से क्रॉस पूछताछ करेगी । मुंगेर पुलिस ने अब तक बीस एके-47 तथा काफी संख्या में इसके स्पेयर पार्ट्स को बरामद किया है। गौरतलब है की पूर्व से आर्म्स तस्कर रहे शमशेर ने अपने बड़े भाई नियाजुल रहमान की पहल से वर्ष 2003 में पुरुषोत्तम से मुलाकात की थी।


