विक्रमशिला के समानांतर पुल की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर जल्द ही फैसला हो जाएगा। इसको लेकर सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में बिहार के चीफ सेक्रेटरी और पथ निर्माण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की संयुक्त बैठक इसी महीने होनी है। बैठक में समानांतर पुल के डीपीआर पर फैसला लिया जाएगा।
पुल निर्माण निगम के वरीय परियोजना पदाधिकारी सुरेश राय ने बताया कि 31 दिसंबर को ही बैठक होनी थी। मगर अबतक इससे संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है। मगर जनवरी में विक्रमशिला के समानांतर पुल के लिए मंत्रालय स्तर से निर्देश जारी हो जाएगा।
डीपीआर को अगर मंजूरी मिलती है तो फिर टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जून 2019 से विक्रमशिला के समानांतर पुल का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। वर्ष 2027-28 तक काम पूरा होने का अनुमान है। वर्तमान विक्रमशिला पुल के बनने में भी 11 साल का वक्त लगा था। पुल 2001 में बनकर तैयार हुआ था।
फोरलेन का बनेगा समानांतर पुल और लंबाई 4.37 किमी से अधिक होगी। सड़क की चौड़ाई 19 मीटर होगी और दोनों तरफ फूटपाथ रहेगा। विक्रमशिला पुल की चौड़ाई 11 मीटर है। गंगा नदी पर 120 मीटर का स्पेन बनेगा। इस पर तकरीबन 1900 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पुल एनएच-31 और एनएच-80 से जाकर मिलेगा। समानांतर पुल के निर्माण के लिए बरारी श्मशान घाट, नवगछिया व बीच गंगा की मिट्टी की जांच हो चुकी है।

2016 में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार मार्च 2016 को भागलपुर यात्रा के दौरान विक्रमशिला सेतु के समानांतर पुल बनाने की घोषणा की थी। घोषणा के डेढ़ साल बाद डीपीआर के लिए एजेंसी का चयन हुआ। 2018 में पुल निर्माण निगम की कंसल्टेंसी एजेंसी ने समानांतर पुल की डीपीआर बनाकर मंत्रालय को सौंप दिया था।
पुल की बढ़ेगी उम्र और जाम से राहत
समानांतर पुल के निर्माण से विक्रमशिला पुल पर गाड़ियों का दबाव कम होगा। अभियंताओं की मानें तो इससे पुराने पुल की उम्र भी बढ़ जाएगी। विक्रमशिला पुल से खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, भागलपुर व बांका सहित झारखंड और बंगाल के रास्ते आने-जाने वाली गाड़ियों का आवागमन होता है। इस कारण लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।

समानांतर पुल के जमीन अधिग्रहण के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन होगा
पीएम पैकेज में शामिल होने के बाद विक्रमशिला के समानांतर पुल के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्रशासन तेज करेगा। जमीन का सामाजिक प्रभाव आकलन करने के लिए तीन एजेंसियों का प्रस्ताव प्रशासन को मिल चुका है। प्रशासन फरवरी में शिलान्यास कराने की तैयारी कर रहा है।
विक्रमशिला पुल के पूरब सामानांतरण पुल की योजना है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू होने से पहले पुल का शिलान्यास करा लिया जाए। अधिग्रहण करने वाली जमीन का अनुमानित प्राक्कलन राशि 59 करोड़ 12 लाख 33 हजार 718 रुपये आंकी गयी है। इसकी राशि बढ़ भी सकती है। प्राक्कलन राशि की मांग भी संबंधित विभाग से की गयी है। इसके लिए मखुजान मौजा की 10.98 एकड़,महादेवपुर मौजा की 35.53 एकड़,परबत्ता मौजा की .48 एकड़ और भागलपुर नगर निगम मौजा की 4.41 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना है।

जमीन अधिग्रहित करने के लिए प्रशासन को अधियाचना भेज
पुल निर्माण निगम जमीन अधिग्रहित करने के लिए प्रशासन को अधियाचना भेज चुका है। जिला भू-अर्जन कार्यालय ने सामाजिक प्रभाव आकलन ((एसआईए) के लिए तीन संस्थानों आद्री बिहार पटना, चन्द्रगुप्ता प्रबंधन संस्थान पटना और अनुग्रह नारायण सिन्हा बिहार को प्रस्ताव भेजकर शुल्क की जानकारी मांगी थी। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने बताया कि तीनों संस्थान से सामाजिक प्रभाव आकलन शुल्क से संबंधित प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है। उसमें से जिसका सबसे कम शुल्क है। उसका चयन डीएम करेंगे। इसके बाद अधियाची विभाग से आवंटन की मांग की जाएगी। आवंटन मिलने के बाद सामाजिक प्रभाव आकलन किया जाएगा।
इस संबंध में भागपलुर के डीएम प्रणव कुमार ने बताया कि विक्रमशिला पुल के समानांतर पुल के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है।


