खरीक : कोसी नदी के करवट बदलने से खरीक प्रखंड के चोरहर के 200 घरों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. जिस हिसाब से कटाव का दायरा बढ़ता जा रहा है उससे अब ग्रामीणों को लगने लगा है कि कभी भी चोरहर के तकरीबन 200 परिवार के लोगों के घर कोसी में समा जाएंगे. खरीक अंचलाधिकारी विनय शंकर पंडा ने फिलहाल कटाव की त्रासदी को मद्देनजर 14 लोगों को घर खाली करने का आदेश जारी किया है. प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि वह घर जो कोसी कटाव के मुहाने पर है. ऐसे घरों में लोग नहीं रहें और घर खाली कर दे.

बुधवार को हुए भीषण कटाव से कोसी चोर हर गांव को पश्चिम हिस्से में अंदर घुसकर पूरे चोरहर बस्ती को अपनी आगोश में समाने को उद्धत है. बीते एक सप्ताह से चोरहर में लगातार हो रहे भीषण कटाव से चोरहर के लोग अब अपने आप को असुरक्षित समझने लगे हैं. लंबे समय से कोसी कटाव की त्रासदी झेल रहे चोरहर के ग्रामीणों का अनुभव है कि चोरहर के समीप जिस प्रकार से कोसी अपने पूर्व निर्धारित रुख में परिवर्तन कर रही है उससे लगता है आने वाले कुछ वर्षों में चोरहर की आधी आबादी के घर कटाव की भेंट चढ़ जाएगा.

बचाव कार्य महज खानापूर्ति

चोरहर में जो भी बचाव कार्य अब तक हुआ है और हो रहा है, महज खानापूर्ति है. चोरहर के ग्रामीणों में संगठित नेतृत्व के अभाव में कटाव निरोधी कार्य आधा अधूरा कार्य किया गया है. तकरीबन 10 करोड़ की लागत से बना तटबंध आधा अधूरा है. प्राक्कलन के मुताबिक तटबंध पर जितनी मिट्टी पड़नी चाहिए उस हिसाब से ठेकेदारों ने मिट्टी नहीं दिया.तटबंध के चौड़ाई कम कर दी गई.तटबंध का निर्माण प्राक्कलन के मुताबिक नहीं हुआ.नतीजा कोसी नदी के घटते जल स्तर के प्रवाह वेग को भी नहीं बर्दाश्त कर सका और तटबंध ध्वस्त हो कर कोसी में समा गया.

तटबंध ध्वस्त होने से ठेकेदारों की चांदी

चोरहर में हर साल करोड़ों रुपए कटाव के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं. फिर भी लोगों के घर उजड़ रहे हैं. इस बार तटबंध ध्वस्त होने से अगले वित्तीय वर्ष में चोरहर पॉइंट पर बड़े पैमाने पर कटाव निरोधी कार्य किया जाना है.तटबंध दस्त होने से ठेकेदारों की चांदी कट रही है. ठेकेदार मूंछ पर ताव देकर अगले वित्तीय वर्ष का गिद्ध दृष्टि से इंतजार कर रहे हैं.

लोगों का जब घर उजड़ने लगा प्रशासन ने बचाव कार्य जोर-शोर से करने का निर्देश दिया जल संसाधन विभाग के हाथ-पांव फूलने लगे मुश्किल से 5 से 10 मजदूरों से काम कराया गया 2 दिन कार्य होते होते जल संसाधन विभाग और ठेकेदार के हाथ पैर फूलने लगे.जल संसाधन विभाग ने तो साफ हाथ खड़ा कर दिया है. जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि बाढ़ का समय समाप्त हो गया है. बड़े पैमाने पर अभी बचाव कार्य नहीं किया जा सकता.बड़े पैमाने पर बचाव कार्य एंटी इरोजन के तहत ही प्राक्कलन बनने के बाद होगा. ऐसी स्थिति में जब चोरहर के ग्रामीणों के घर अभी ध्वस्त होकर कोसी में समाने लगे तो बचाव कार्य नही हुआ. जल संसाधन विभाग ने अपने हाथ खड़े कर दिए कि अभी बड़े पैमाने पर कार्य नहीं हो सकता. ग्रामीणों का कहना है जब अभी बचाव कार्य नहीं हो सकता तो फिर जब प्राक्कलन बनाकर भेजा दर्द जाता है और आवंटन भी प्राप्त होता है. तो फिर काम सही क्यों नहीं होता है हम लोगों की सुरक्षा के हितों से खिलवाड़ किया जा रहा है. चोरहर के ग्रामीणों का कहना है कि हर हालात में गांव को बचाने के लिए मुकम्मल व्यवस्था करने की जरूरत है.

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By Rishav Mishra Krishna

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