नवगछिया : जांबाज दरोगा आशीष कुमार के शहीद होने के पीछे की कहानी के पीछे भी एक कहानी हो सकती है. लेकिन फिलहाल पुलिस के टॉप टारगेट पर दिनेश मुनि और उसका सहयोगी अशोक मंडल है जबकि बात यह सामने आ रही है जब अपराधी बेहद करीब से गोली चला रहे थे तो उस समय आशीष किसी पुलिस कर्मी से ही फोन पर बार बार बात कर रहा था. इस क्रम में कोई आशीष मदद मांग रहा था और दूसरी तरफ से कहा जा रहा था वह दियारा पहुंच गया है. अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि आखिर दरोगा आशीष किस से बात कर रहा था. वह कौन था जो आशीष को झूठा आश्वासन दे रहा था कि वह दियारा पहुंच चुका है. बहरहाल मोबाइल कॉल डिटेल खंगालने के बाद ही इस तरह के मामले का खुलासा होगा.
दूसरी तरफ एक सवाल यह भी है कि जब भी पुलिस किसी दूसरे जिले में जाकर कार्रवाई करती है तो दोनों जिले के पुलिस कप्तान की पहले सहमति होती है फिर दोनों पुलिस संयुक्त रूप से काम्बिंग ऑपरेशन चलाती है. क्या दरोगा आशीष बिना नवगछिया पुलिस को सूचना दिए ही दुधैला गांव में प्रवेश कर गए थे ? ट्रैक्टर लेकर छापेमारी में पहुंचने वाली पसराहा पुलिस की कार्रवाई की सूचना क्या सच में नवगछिया पुलिस को नहीं थी ? आशीष के कुछ जानकार सहकर्मियों की मांग है तो आशीष जांबाज था और निडर भी था लेकिन वह नियम कानून का भी उतना ही पालन करता था.

उसने व्यवहारिक तौर पर भी जरूर इसकी सूचना संबंधित क्षेत्र के थाने को दी होगी. आशीष के कई सहकर्मी अपना नाम ना छापने के शर्त पर स्पष्ट कहा कि इस हत्याकांड में पुलिस जितनी तत्परता दिनेश मुनि और उसके गिरोह को सदस्यों की गिरफ्तारी करने के लिए दिखा रही है उसी तत्परता के साथ इस घटना के जिम्मेदार लोगों को भी सामने लाना चाहिए और उस पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए. दिनेश का शागिर्द मुख्य जिसके बिछाए जाल में दरोगा आशीष फस गए कहीं वह मुखबिर खाकी वर्दी में ही तो छुपा हुआ नहीं है ?
आशीष के सहकर्मी पुलिसकर्मियों ने बताया पसराहा से दूर हटकर अगर आप घटनास्थल के आसपास की स्थानीय राजनीति का जायजा लेंगे तो पता चलेगा कि कुछ सफेदपोश ही अपराधियों को पुलिस से संरक्षण प्राप्त करवाते हैं और अपराधियों से एक सुनिश्चित आए भी प्राप्त करते हैं. ऐसे सफेदपोश लोगों के लिए दिनेश मुनि एक दुधारू गाय से कम नहीं था. ऐसे लोग कभी नहीं चाहते होंगे कि दिनेश मुनि गिरफ्तार हो जाए और उनके आय का स्रोत ठप पड़ जाए.


