दीपावली 7 नवंबर को मनायी जाएगी। ज्योतिष के अनुसार इस दिन विशिष्ट योग बन रहा है। गुरु, मंगल के स्वामित्व वाली राशि वृश्चिक में होगी। मंगल, शनि की स्वामित्व वाली राशि कुंभ में होगी व शनि, गुरु के स्वामित्व वाली राशि धनु में होगी। शुक्र स्वयं की राशि तुला में रहेगा। शुक्र का अपनी राशि में होना मालव्य योग बन रहा है। पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि 59 साल बाद इस योग में दीपावली मनेगी।

बुधवार होने से शुभ व स्वाति नक्षत्र होने से सुखद वातावरण में दीपावली का त्योहार मनेगा। पंडित झा के अनुसार इसके पहले 1 नवंबर 1959 को दीपावली पर गुरु वृश्चिक में एवं शनि धनु राशि में था। उन्होंने बताया कि इस बार दीपावली के पहले 1 नवंबर को शुक्र उदय हो जाएगा। मंगल-केतु की युति भी समाप्त हो जाएगी, जिससे शांति का वातावरण रहेगा।

दीपावली पर सुबह महाकाली का, दोपहर में पितरों का पूजन व शाम में महालक्ष्मी तथा कुबेर का पूजन करें तथा हनुमान जी का दर्शन करें। इससे घर में सुख-शांति व समृद्धि आएगी। शरद पूर्णिमा से कार्तिक माह शुरू हो गया। पंडित अजीत पाण्डेय के अनुसार देवउठनी ग्यारस से मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है और चातुर्मास समाप्त होता है। कार्तिक में राधा-दामोदर पूजन का खास महत्व है। भगवान को तुलसी, मालती, कमल व अगस्त्य के फूल चढ़ाने चाहिए। इस माह में सूर्योदय के पहले उठकर तीर्थ स्नान करें व राधा-दामोदर का पूजन करें। इससे भाग्य खुलता है।

1959 में नवंबर को दीपावली पर गुरु वृश्चिक में व शनि धनु राशि में था

कार्तिक में पर्व-त्योहार

5 नवंबर : सोम प्रदोष, धन तेरस

6 नवंबर : रूप चौदस

7 नवंबर : दीपावली

8 नवंबर : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

9 नवंबर : भाईदूज, यम द्वितीया

13 नवंबर : सूर्य षष्ठी, छठ पूजा

16 नवंबर : गोपाष्टमी

17 नवंबर : आंवला नवमी

19 नवंबर : देवउठनी ग्यारस

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By Rishav Mishra Krishna

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