पितृपक्ष दस सितंबर से शुरू होगा। इसका समापन 25 सितंबर को होगा। चैती दुर्गा मंदिर मंदिर के पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान 16 दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं होगा।
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दस सितम्बर को ऋषि मुनियों का तर्पण होता है। उसके बाद 15 दिनों तक पूर्वजों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है।
उन्होंने बताया कि ऐसी पौराणिक मान्यता है कि पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिससे प्रसन्न होकर वे अपने वंशजों पर कृपा दृष्टि रखते हैं। पितृपक्ष हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है।

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