पिछले दाे दिन से नवगछिया के जगतपुर झील अाैर इसके आसपास के जलजमाव वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बतखाें की विभिन्न प्रजातियां दिख रही हैं। टीएमबीयू के जूलाॅजी के प्राेफेसर डाॅ. डीएन चाैधरी अाैर पक्षी प्रेमियाें के दल ने इनका सर्वेक्षण किया। डाॅ. चाैधरी ने बताया कि बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी इन क्षेत्रों में दिख रहे हैं। इस बार पक्षियों की विविधता बढ़ी है। बड़ी शिल्ही (लार्ज व्हिस्लिंग डक) स्थानीय पक्षी है, लेकिन कई वर्षाें बाद इस बार दाे साै से ढाई साै की संख्या में दिखी हैं।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक और पक्षी प्रेमियाें के दल ने किया सर्वेक्षण

अनुकूल वातावरण की तलाश में हजारों किलोमीटर से अाईं

यहां प्रवासी पक्षी कॉमन कूट, पिन टेल डक, लालसर, वीजन डक, ह्वाइट आई पोचार्ड, नॉर्दर्न सोभलर, गडवाल डक, काॅमन पोचार्ड, कॉमन टील जैसी बतख की प्रजातियां भी देखी जा रही हैं। ये प्रवासी पक्षी रूस, अलास्का, मंगोलिया, तिब्बत, सेंट्रल एशिया जैसे ठंडे देशाें से यहां आते हैं। तीन-चार महीने यहां रह कर मार्च के अंत में लाैट जाते हैं। अनुकूल वातावरण की तलाश में ये प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर हमारे क्षेत्रों के तालाबों, झीलों, जलजमाव वाले क्षेत्रों अाैर नदियों में शरण लेते हैं। सर्वेक्षण दल में राहुल रोहिताश्व, गंगा प्रहरी दीपक साह अाैर राजा बोस शामिल हैं।

लंबे समय बाद काम्ब डक भी कर रही विहार

डॉ. चौधरी ने बताया कि इन पक्षियों के अलावा स्थानीय पक्षियों में लोहा सारंग, पर्पल हेराॅन, ग्रे हेरॉन, लेसर अाैर ग्रेटर एडजुटेंट स्टार्क भी बड़ी संख्या में हैं। इस बार झील में लंबे समय बाद छह-सात काम्ब डक (नकटा) भी दिखाई दिए।

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By न्यूज़ डेस्क

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