बिहपुर प्रखंड के सोनवर्षा गंगा दियारा क्षेत्र में गंगा की धारा एक बार फिर बदल गई है, जिसके कारण वह जमीन फिर से बाहर आने लगी है जो पहले नदी में समा जाने के बाद बिहार सरकार के नाम दर्ज हो गई थी। जमीन के उभरते ही स्थानीय किसान और रैयत सक्रिय हो गए हैं और मांग कर रहे हैं कि इस भूमि की जमाबंदी दोबारा उनके पुराने रैयतों और उत्तराधिकारियों के नाम की जाए।
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किसानों का कहना है कि यह जमीन वर्षों पहले उनकी थी, लेकिन नदी के कटाव में बह जाने के बाद इसे सरकारी भूमि घोषित कर दिया गया था। अब जब जमीन दोबारा उभर आई है, तो उसे किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को देना सरासर अन्याय होगा और इससे बड़ा विवाद भी खड़ा हो सकता है।
कामरेड प्रणेश समदर्शी ने बताया कि किसानों की इस लंबित समस्या के समाधान के लिए जल्द ही अंचल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि प्रशासन उचित निर्णय लेकर किसानों के अधिकारों की रक्षा कर सके।

