बिहार चुनाव 2020 में जीत के बाद पहली बार भागलपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिले के बिहपुर में जयरामपुर के गुवारीडीह बहियार में करीब तीन हजार पूर्व की प्राचीन सभ्यता के मिल रहे अवशेषों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कि पुरातात्विक अवशेष के संरक्षण के लिए कोसी के धार को मोड़ा जाएगा। स्थल का पूर्ण अध्ययन होगा। वह रविवार को गुवारि डीह का का निरीक्षण करने आए थे।
उन्होंने स्थल निरीक्षण के बाद जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ कोसी धार का भी निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लगभग ढाई हजार साल पुराना ऐतिहासिक स्थल है। पुरातत्व विभाग और जल संसाधन विभाग की पूरी टीम कोसी कछार के पूरे एरिया में उत्खनन कर अवशेषों को खोजेगी। मैनिंग विभाग के अभियंताओं को भी निर्देश दिया गया है। यह बड़ी खुशी को बात है कि बिहार इतना पुराना ऐतिहासिक स्थल मिला है। उस समय यहां लोग शहर या गांव बनाकर रहते होंगे।

सीएम ने कहा कि जल संसाधन मंत्री विजय चोधरी को इसके लिए कहा गया है। जल्द ही विशेषज्ञ की टीम पूरे इलाके का अध्ययन करने आएगी। सीएम ने कहा कि इससे पहले बांका जिले में भी ऐतिहासिक अवशेष मिले थे। बिहार के जमुई बांका भागलपुर जिले में पौराणिक अवशेषों का मिलना अपने आप में बड़ा महत्व रखता है। इन स्थलों को ऐतिहासिक स्थलों को डेवलप किया जाएगा। कल तक इस इलाके के बारे में मुझे भी नहीं पता था। बिहपुर विधायक ने कटाव में मिले अवशेष की जानकारी दी। इसके बाद देखने की इच्छा हुई। नीतीश ने कहा कि अध्ययन करने के बाद इन क्षेत्रों में जहां जहां अवशेष मिलेंगे उसके बाद कोसी के धारा को मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया जाएगा। धार में परिवर्तन के बाद इस इलाके में कटाव की समस्या भी समाप्त हो जाएगी
बांका के अमरपुर स्थित भदरिया मेंबुद्धकालीन पुरातात्विक अवशेषों को देखा
इससे पहले सीएम नीतीश बीते 12 दिसंबर को बांका जिले के अमरपुर स्थित भदरिया में मिले बुद्धकालीन पुरातात्विक अवशेषों को देखने पहुंचे थे। पटना लौटने से पहले मुख्यमंत्री ने जमुई के लछुआड़ स्थित भगवान महावीर के जन्मस्थान पहुंचे और वहां हो रहे निर्माण कार्य को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भदरिया और आसपास के गांवों को विकसित करेगी। यहां चांदन नदी में मिले पुरातात्विक अवशेषों को संरक्षित करेगी और इसके लिए नदी की धारा मोड़ी जाएगी। कहा कि भदरिया के पास चांदन नदी में मिले भगवान बुद्ध से जुड़े पौराणिक अवशेषों को के संरक्षण व विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सीएम ने कहा कि पुरातत्व विभाग के अनुसार यह अवशेष 26 सौ साल पुराना है। उन्होंने कहा कि चांदन नदी में चूंकि पानी है, इस कारण यहां मिले अवशेषों की खुदाई व जांच संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए सिंचाई विभाग को आदेश दिया कि वर्ष 1995 से जहां चांदन नदी की धारा थी, उधर ही पानी का बहाव मोड़ा जाए ताकि इसकी खुदाई व जांच हो सके। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखकर इसकी खुदाई करायी जाएगी। सीएम ने कहा कि चांदन नदी में मिले अवशेष को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए आसपास के गांवों को भी विकसित किया जाएगा
By न्यूज़ डेस्क
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