बिहपुर। बिहपुर प्रखंड के मिल्की गांव स्थित हजरत दाता मांगन शाह रहमतुल्लाह अलैह का दरबार वर्षों से आपसी भाईचारे, इंसानियत और सौहार्द की अनूठी मिसाल बना हुआ है। यहां न कोई धर्म का भेद है, न जाति का और न ही अमीर-गरीब का फर्क। दरबार में पहुंचते ही हर व्यक्ति केवल एक इंसान बन जाता है, जहां सिर झुकाने वालों की कतार में सभी बराबर नजर आते हैं।

मिल्की पंचायत में स्थित मजार-ए-शरीफ पर सालाना उर्स के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया है। शुक्रवार की रात परंपरागत सौहार्द के साथ उत्सव की शुरुआत हुई। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार सबसे पहली चादर कायस्थ परिवार की ओर से चढ़ाई गई। इसके बाद दूसरी चादर बिहपुर के अंचलाधिकारी लवकुश कुमार ने अर्पित की। इसके पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चादरपोशी कर अपनी श्रद्धा प्रकट की।

उर्स के मौके पर लगे मेले में भारी भीड़ उमड़ रही है। खाने-पीने की दुकानों से लेकर घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक की खूब बिक्री हो रही है। खास आकर्षण का केंद्र तलवार की दुकानें बनी हुई हैं। सड़क किनारे सजी इन दुकानों पर अलग-अलग आकार और डिजाइन की तलवारें सजी हैं। पूर्णिया जिले से आए एक दुकानदार ने बताया कि यहां 200 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक की तलवारें बिक रही हैं और लोगों में इन्हें लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।

मान्यता के अनुसार यह इलाका कभी घना जंगल हुआ करता था और दाता मांगन शाह की मजार की रखवाली शेर किया करते थे। ब्रिटिश काल में भी यहां उर्स-ए-पाक के आयोजन का उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार बिहपुर के बालाचंद मजूमदार को एक झूठे हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई जाने वाली थी, लेकिन परिजनों की दुआ और दाता के दरबार में फरियाद के बाद उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया गया।

उर्स-ए-पाक निगरानी कमेटी के सचिव रबूल हसन ने बताया कि वर्ष 2012 से दरगाह की व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इन दिनों दरगाह पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। जियारत के बाद खासकर महिलाएं मन्नत के धागे बांधती नजर आ रही हैं। धागों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि नई मन्नत के लिए जगह ढूंढना मुश्किल हो रहा है। भागलपुर के भीट्ठी गांव की नसीमा खातून ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों से लगातार उर्स में हाजिरी लगा रही हैं। वहीं एकचारी गनौरा के मो. मांगन और मधेपुरा जिले के बिहारीगंज प्रखंड के देवल गांव के मो. आलम ने भी वर्षों से दरबार में आस्था जताने की बात कही।

दाता मांगन शाह के उर्स में पहली चादरपोशी की परंपरा वर्षों से मजूमदार परिवार निभाता आ रहा है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी अरविंद मजूमदार निभा रहे हैं। उनकी पत्नी व शिक्षिका हीरा देवी ने बताया कि उनके परिवार में यह आस्था पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और आगे भी यह परंपरा जारी रहेगी।

वहीं खानकाह ए आलिया कादिरिया फरीदिया मोहब्बतिया की ओर से भी उर्स-ए-पाक के अवसर पर विशेष चादरपोशी की गई। सज्जादानशीन हजरत अली कौनैन खां कादरी फरीदी एवं नायब सज्जादानशीन मौलाना अली शब्बर खां कादरी फरीदी की अगुवाई में यह रस्म अदा हुई, जिसमें सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए।

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By न्यूज़ डेस्क

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