नवगछिया : पति की लंबी आयु व अखंड सौभाग्य की कामना के साथ मधुश्रावणी व्रत सोमवार से शुरू हो गया। नवविवाहिताओं ने नाग-नागिन, हाथी, गौरी, शिव आदि की प्रतिमा बनाकर अपने-अपने घरों में पूजा की। इस दौरान फल व मिठाई का भोग लगाया गया। शाम के समय नवविवाहिता टोली बनाकर गली-मोहल्ले व बाग-बगीचे में फूल तोड़ने की परंपरा भी निभाई।
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बैजानी की प्रिया झा ने अपने पति राहुल राज की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखी है। उन्होंने बताया कि लोक पर्व मधुश्रावणी व्रत आज प्रथम सोमवार के श्रावण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि से प्रारंभ हो गया है। शादी के बाद आने वाले पहले श्रावण मास में नवविवाहिताएं यह व्रत करती हैं। इस व्रत में महिला पुरोहित द्वारा मैना पंचमी, बिहुला-विषहरी, गौरी सती आदि की कथा सुनाई जाती है। उन्होंने कहा कि इस पूजा में ससुराल से आए प्रसाद पकवान का उपयोग किया जाता है। पूजा के अंतिम दिन व्रती को टेमी दागने की परंपरा है। उधर नया बाजार की दीक्षा रानी भी अपने घरों में मधुश्रावणी व्रत कर रही हैं।
इधर पंडित सौरभ कुमार मिश्रा ने बताया कि मधुश्रावणी पर्व का समापन नवविवाहिता के घुटने पर जलते दीये की बाती से दागने के साथ होता है। कहा जाता है कि टेमी से दागे गए स्थान पर जितने ही बड़े फफोले होंगे, उतनी ही पति की आयु लंबी होगी। उन्होंने बताया कि सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि व शिव की पुत्री मंसा की कथा से इस पर्व की शुरुआत होती है। यह पर्व 31 जुलाई को समाप्त होगा।

