नवगछिया : राजा चंदेल द्वारा स्थापित पुनामा प्रताप नगर में दुर्गा मंदिर में ज्योत की पूजा होती है, जिसका इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है। यह मंदिर चंदेल राजा प्रताप राव ने 1526 ईस्वी में स्थापित किया था। कई राज्यों के भक्त यहां आकर माता के दरबार में मन्नत मांगते हैं, दंड प्रणाम करते हैं और मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाते हैं।
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यहां बड़ी संख्या में बलि प्रदान की जाती है। पूनामा प्रताप नगर निवासी प्रीतम सिंह ने बताया कि चंदेल राजा प्रताप राव अपनी बहन पूर्णिमा के साथ 1526 में यहां आए थे, और उनके नाम पर पुनामा प्रताप नगर बसा।
मंदिर में मां कामाख्या के तर्ज पर पूजा होती है, जहां प्रतिमा नहीं बिठाई जाती है, बल्कि ज्योत की पूजा होती है। प्रथम पूजा, पंचम पूजा, और सप्तम पूजा के अवसर पर एक-एक बलि दी जाती है। सप्तम पूजा को निशा बलि दी जाती है, जिसे देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ जुटती है। अष्टमी, नवमी के दिन एक बलि और नवमी-दसवीं को हजारों बलि प्रदान की जाती है। मंदिर में प्रवीण सिंह संकल्प लेते हैं, जबकि जितेंद्र सिंह, संजय कुमार सिंह, और विजेंद्र सिंह सहयोगी होते हैं।

पहले यह मंदिर पूर्णिया प्रताप नगर में स्थापित था, लेकिन कोसी नदी में सात बार कटने के बाद वर्तमान में नवगछिया के राजेंद्र कॉलोनी स्थित पूनामा प्रताप नगर में पुनः स्थापित किया गया है। मन्नत मांगने के लिए कई राज्यों से लोग आते हैं, दंड प्रणाम करते हैं, और मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाते हैं। कलश विसर्जन के समय भी इलाके के श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
