भागलपुर : बिहपुर इलाके में व्यापक पैमाने पर हो रहे शहद के उत्पादन को पंख देने के लिए एपिडा ने कुछ मधु उत्पादकों को लाइसेंस दिया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) से लाइसेंस मिलने के बाद बभनगामा का उत्पादित शहद अमेरिका-लंदन सरीखे विदेशी बाजारों में बिक्री के लिए जाएगा। विदेशी बाजार को ध्यान में रखकर इस इलाके में लीची, तुलसी, आम और सरसों फ्लेवर के शहद का उत्पादन हो रहा है। विदेशों में तुलसी और मैंगो फ्लेवर डिमांड में है।
Total Downloads: 92
ब्रांडेड कंपनियों के बूते अभी 5 करोड़ का है सालाना कारोबार
आत्मा के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि बभनगामा गांव के कई किसान मधु का उत्पादन कर रहे हैं। यहां यह कुटीर उद्योग बन गया है। यहां उत्पादित मधु को देश की नामचीन कंपनियां रॉ-मटेरियल सस्ते दामों में लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग कर तीन से चार गुनी कीमत पर खुदरा बाजार में बेच रही है। इससे मधु उत्पादकों को ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता है। यही वजह है कि बिहपुर कृषि कार्यालय परिसर में नवप्रवर्तन योजना से प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाया गया है, ताकि प्रोसेसिंग व पैकेजिंग का काम बिहपुर में ही हो जाए। एपिडा का साथ मिलने से अब मार्केटिंग में परेशानी नहीं होगी। एपिडा ने ही भागलपुर के जर्दालू आम और कतरनी चूड़ा-चावल को अंतरराष्ट्रीय फलक दिलाया। हालांकि ये दोनों खाद्य पदार्थ को जीआई टैग मिला है। बिहपुर से करीब पांच करोड़ का सालाना कारोबार होता है। एपिडा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह देसी प्रोडक्ट को विदेशों में निर्यात को बढ़ावा देता है।
एपिडा के सहयोग से इस बार स्वयं विदेशों में सप्लाई करेंगे
बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन करने वाले संजय कुमार चौधरी बताते हैं कि भागलपुरी शहद की मांग विदेशों में अधिक है। पहले भी अमेरिका, इंगलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा आदि देशों में भेजा गया है। शहद को विदेश भेजने से पहले मुंबई व अन्य महानगरों के प्रयोगशाला में इसकी गुणवत्ता जांची जाती है। बिहपुर के शहद के 30 फीसदी खरीदार विदेशी निर्यातक हैं। 60 फीसदी ब्रांडेड कंपनियां और शेष 10 फीसदी स्थानीय लोग खरीदते हैं। शहद का उत्पादन बिहपुर के अलावा नवगछिया, खरीक, कहलगांव, पीरपैंती में भी दिसंबर से मार्च माह तक अधिक होता है। एपिडा का साथ मिलने के बाद हमलोग स्वयं एक्सपोर्ट करेंगे।

खुद निर्यातक बनकर बिहपुर के मधु को विदेशी बाजार में बेचेंगे
एपिडा से लाइसेंस प्राप्त उत्पादक कृष्ण मुरारी बताते हैं कि जिले में सालाना लगभग 40 टन शहद उत्पादन होता है। मधुमक्खी तीन किलोमीटर क्षेत्र में घूमकर सरसों, करंच, तुलसी आदि पौधे से रस व पराग जुटाकर वापस अपने बॉक्स में लौटती है। यह प्रक्रिया सात दिनों का होता है। एक बॉक्स में एक बार चार से छह छत्ता डालकर मशीन से शहद निकाला जाता है। साल में 35 से 40 किलो इस बॉक्स से शहद का उत्पादन किया जाता है। वे प्रोसेसिंग के बाद पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग स्वयं करते हैं। इस बार सरकारी प्लेटफार्म से खुद निर्यातक के रूप में शहद विदेशों में भेजेंगे।
