प्रखंड के गौरीपुर में 14 नंबर सड़क पर सुबह करीब छह बजे से मृतक विभूति दास के शव को रखकर सड़क को जाम कर दिया गया था। बीडीओ, सीओ एवं अन्य पुलिस पदाधिकारियों से ग्रामीण, मृतक के परिजन और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं से जब हुई बातचीत बेनतीजा रही तो। नवगछिया एसडीओ अखिलेश कुमार,एसडीपीओ दिलीप कुमार व अन्य अधिकारी भी गौरीपुर पहुंचे। जहां मृतक की मां पुष्पा देवी द्वारा आवेदन को रिसीव करते हुए एसडीओ ने मामले में त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद करीब नौ घंटे के बाद तीन बजे शव को सड़क से हटाया गया। मृतक अपने पांच भाई विभूति, आहूति, लवलेश, कमलेश व अभिषेक समेत अपनी इकलौती बहन खुशी में सबसे बड़ा था। पिता शंभू दास दिल्ली में मजदूरी करते हैं,और वो अभी भी दिल्ली में ही है। पुलिस के साथ बैठक में परिजन, ग्रामीण, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ताओं शामिल हुए। जिसमें पुलिस के द्वारा बिना जांच पड़ताल के ही खुदकुशी करार देकर व यूडी केस दर्ज कर स्वजन को सूचित नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने 14 नंबर सड़क को किया जाम

बुधवार को परिजनों व ग्रामीणों ने मृतक विभूति के शव को 14 नंबर सड़क पर रखकर जाम कर दिया। परिजन व ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस विभूति की मौत को आत्महत्या साबित कर रही है। जबकि मृतक के पेट, गले के पीछे व पूरे शरीर पर गहरे चोट है पुलिस की खुदकुशी की दलील को गलत साबित कर रही है। सुबह छह बजे से बिहपुर-तेतरी 14 नंबर सड़क को गौरीपुर वार्ड नंबर पांच महादलित टोला में मृतक के घर के सामने शव को रखकर जाम कर दिया। नवगछिया पुलिस जिले के बिहपुर, भवानीपुर, खरीक, नदी थाना,परबत्ता, गोपालपुर, इस्माईलपुर व ढोलबज्जा थाने से पुलिस पदाधिकारी व बलों के साथ बिहपुर बीडीओ सतीश कुमार, सीओ बलिराम प्रसाद, गोपालपुर के इंस्पेक्टर भारतभूषण मौके पर करीब चार घंटे बाद पहुंचे। जहां अधिकारियों ने बातचीत का प्रस्ताव दिया।

कार्यशैली: पहले पुलिस ने आरोपी को पकड़ा, फिर दर्ज की गई चोरी की रिपोर्ट

मंगलवार की सुबह में मृतक के परिजन विभूति से मिलने थाने गए तो उसे वहां से भगा दिया गया। मां का आरोप है कि पुलिस ने विभूति को 23 अप्रैल की रात में ही गिरफ्तार किया तो उसे 24 घंटे में जेल क्यों नहीं भेजा। जिस स्कार्पियो चोरी केस में उसकी गिरफ्तारी 23 की रात में की गई, उसका आवेदन 25 को झंडापुर ओपी से बिहपुर थाना आता है। जहां 26 को उक्त केस रजिस्टर्ड होता है। यानि झंडापुर ओपी पुलिस इतना फास्ट काम करती है कि आवेदन प्राप्त व केस होने के पूर्व ही आरोपी को पकड़ लेती है। 26 को ही उक्त केस को लेकर एसपी प्रेसवार्ता करते हैं। और 27 की सुबह आरोपी विभूति की मौत ओपी हाजत में हो जाती है। इस मामले में मृतक की मां के द्वारा मंगलवार को दिए आवेदन के आलाेक में प्राथमिकी दर्ज अब तक क्यों नहीं की गई है। परिजन, ग्रामीण, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि मामले में दोषी झंडापुर ओपी के प्रभारी अध्यक्ष हरिशंकर सिंह, समेत अन्य दोषी पर तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज हो एवं अविलंब गिरफ्तारी हो। वहीं पुलिस इस घटना को खुदकुशी बताकर अपने कुकर्म पर पर्दा डालना चाह रही है। इसलिए एक मेडिकल बोर्ड गठित कर पुन: शव का पोस्टमार्टम हो, जिसकी वीडीओग्राफी कराई जाए। वहीं मृतक के स्वजन को सरकारी मुआवजा राशि, एक आश्रित को सरकारी नौकरी तत्काल दी जाए। 24 अक्टूबर 2020 को बिहपुर थाना हाजत में पुलिस की पिटाई से 25 की सुबह मड़वा गांव के ई. आशुतोष पाठक की मौत मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन बिहपुर थानेदार रणजीत कुमार अब भी फरार है। इसलिए इस मामले में दोषी झंडापुर ओपी के प्रभारी अध्यक्ष हरिशंकर सिंह,समेत अन्य दोषी की अविलंब गिरफ्तारी हो।

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By न्यूज़ डेस्क

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