नवगछिया के रंगरा प्रखंड के झल्लूदास टोला गंगा घाट पर हुआ यह हादसा बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। एक ही परिवार के तीन लोगों की जान जाना न सिर्फ परिजनों बल्कि पूरे इलाके के लिए बड़ा आघात है।
घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शोक व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है और आपदा प्रबंधन विभाग को तत्काल सहायता देने का निर्देश दिया है। यह राहत जरूरी है, लेकिन ऐसे हादसों को रोकना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
परिजनों ने जिस तरह घाट पर सुरक्षा की कमी—जैसे बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और निगरानी—की बात उठाई है, वह एक गंभीर मुद्दा है। गंगा घाटों पर अक्सर लोग धार्मिक अनुष्ठान और स्नान के लिए जाते हैं, ऐसे में वहां बुनियादी सुरक्षा इंतजाम होना बेहद जरूरी है।

इस घटना से जुड़े जरूरी सवाल:
- क्या घाट पर पहले से कोई सुरक्षा व्यवस्था थी?
- क्या स्थानीय प्रशासन ने खतरनाक इलाकों को चिन्हित किया था?
- क्या SDRF या गोताखोरों की नियमित तैनाती होनी चाहिए?
आगे के लिए जरूरी कदम:
- गहरे पानी वाले स्थानों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं
- घाटों पर अस्थायी बैरिकेडिंग और रस्सी की व्यवस्था हो
- भीड़भाड़ वाले घाटों पर प्रशिक्षित गोताखोर और रेस्क्यू टीम मौजूद रहे
- स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमित निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जाए
ऐसी घटनाएं अक्सर लापरवाही और तैयारी की कमी के कारण होती हैं। अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

