नवगछिया : एनएच 31 स्थित अशोक अग्रवाल के प्लांट के पास 10 कट्ठा जमीन विवाद को लेकर फौजी की हत्या की गयी है। उस स्थान पर फौजी और गोपी सरदार दोनों की जमीन है। फौजी के भाई विजय यादव ने बताया कि आठ साल पहले धरहरा के एक जमीन मालिक से वहां डेढ़ बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन मालिक ने तीनों भाइयों को जमीन रजिस्ट्री कर दी थी। तीन माह पूर्व डेढ़ बीघा जमीन से दस कट्ठा जमीन गोपी सरदार ने एक भाई से पुनः रजिस्ट्री करवा ली, जिसे वह घेरना चाह रहा था। जिसका हमारे भाई ने विरोध किया था। तीन बार जमीन की नापी भी की गई लेकिन गोपी सरदार मानने को तैयार नहीं था। भाई ने बताया कि गांव में जमीन के विवाद के कारण ही मेरा भाई फौज की नौकरी छोड़ कर आया था और जमीन विवाद में ही उसकी जान चली गई। मृतक एनएच 31 पर ढाबा खोलने वाला था, जो बनकर तैयार हो गया था। 19 अप्रैल को ढाबा का उद्घाटन भी होना था।

पुलिस के खिलाफ आक्रोश, छह बच्चे हुए अनाथ

जवान की हुई दिनदहाड़े हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई। अनुमंडलीय अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पुलिस प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटने लगा था। फौजी की बेटी पुलिस को देखते ही आगबबूला हो गई थी और पंचनामा के लिए आये पुलिस पदाधिकारी से उलझ गयी। पुलिस को देखते ही वह बोलने लगी कि पुलिसवालों ने ही हमारे पिता की हत्या कराई है।

जवान की मौत से छह बच्चे मौसम, छोटी, प्राची, रत्नप्रिया, लाखो और नन्हा केशव अनाथ हो गये। उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। बच्चे पिता के शव पर दहाड़ मारकर रो रहे थे। वही पत्नी रुबी देवी बार-बार बेहोश हो जा रही थी। आक्रोशित परिजन पुलिस को पंचनामा के लिए शव के पास सटने नहीं दे रहे थे। बाद में प्रशिक्षु डीएसपी अशोक कुमार, इंस्पेक्टर मार्कण्डय सिंह, थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

जवान अजय की हत्या के बाद बदले की कार्रवाई से अशांत होगा गांव

नवगछिया। वर्चस्व की लड़ाई में दर्जनों लाशों के गिरने के बाद विधवाओं का गांव कहा जाने वाला भवानीपुर दशकों तक शांत रहने के बाद एक बार फिर धधक उठा है। फौजी अजय यादव की हत्या के बाद उमड़े जनसैलाब और मृतक के आक्रोशित परिजनों द्वारा बदला लिए जाने की सरेआम घोषणा किये जाने के बाद लगने लगा है कि भवानीपुर गांव फिर से एक बार रक्तरंजित होगा। बदले की कार्रवाई में गांव में खूनी खेल खेले जाने की आशंकाएं लोग जता रहे थे।

भवानीपुर का रक्त रंजीत इतिहास रहा है। यहां मुनील यादव और कुमौदी यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई में दर्जनों लाशें गिरी हैं। हत्या दर हत्या किए जाने के बाद यह गांव सफेद साड़ी में लिपटी विधवाओं का गांव कहा जाने लगा। गांव में वर्चस्व की लड़ाई में मुनील यादव, उसके कई भाइयों की हत्या हुई। दो भाई की एक ही दिन हत्या हो जाने से इलाके में सनसनी फैल गयी थी। कुख्यात भोला यादव को काटकर कोसी में फेंक दिया गया था। रोजाना लाशों के गिरने से लोग इस रास्ते जाने से कतराने लगे थे।

वर्चस्व की लंबी कहानी बयां करनेवाला भवानीपुर जवान अजय यादव की सरेआम हत्या के बाद फिर से अशांत होने के कगार पर है। बदले की कार्रवाई से किसी भी समय भवानीपुर अशांत हो सकता है। जरूरत है पुलिस की कठोर कार्रवाई की, ताकि भवानीपुर को अशांत होने से रोका जा सके।

input:Hindustan

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By न्यूज़ डेस्क

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