बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के सरकारी कर्मचारियों को तोहफे का ऐलान कर दिया है. सरकार ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन (पदोन्नति) में आरक्षण लागू कर दिया है.

पटना: 2019 में लोकसभा चुनाव और 2020 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के सरकारी कर्मचारियों को तोहफे का ऐलान कर दिया है. सरकार ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन (पदोन्नति) में आरक्षण लागू कर दिया है. चुनावी सीजन में नीतीश सरकार के इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है. दरअसल, बिहार में दलितों को लेकर एनडीए और महागठबंधन में खींचतान जारी है. दोनों पक्ष दलितों को अपने-अपने पाले में करने की कोशिश में जुटे हैं.

महागठबंधन के सबसे बड़े चेहरे तेजस्वी यादव समझ चुके हैं कि बिहार में सत्ता हासिल करने के लिए यादव+मुस्लिम के साथ दलितों का साथ जरूरी है. इसी बात को ध्यान में रखकर वह बिहार में दलित के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को एनडीए से तोड़कर महागठबंधन में जोड़ चुके हैं. जेडीयू से नाराज उदय नारायण चौधरी को भी तेजस्वी यादव आरजेडी में आने का निमंत्रण भेज चुके हैं. इसके अलावा तेजस्वी यादव जेडीयू के कुछ और क्षेत्रीय दलित चेहरों को भी अपने साथ जोड़ चुके हैं.

वहीं नीतीश कुमार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी जैसे बड़े दलित नेता को अपने साथ ले आए हैं. इसके अलावा एनडीए में रामविलास पासवान के चेहरे को भी प्रमुखता से आगे किया जा रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में दलितों के करीब 12 फीसदी वोट हैं. मौजूदा राजनीतिक हालात में ये वोटर जिस भी पाले में जाएंगे वहां निर्णायक रेाल निभाएंगे.

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल पांच जून को केंद्र सरकार को कानून के अनुसार कर्मचारियों की निश्चित श्रेणी में प्रमोशन में आरक्षण देने की अनुमति दी थी. इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने नौकरियों में प्रमोशन को लेकर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को तब तक बरकरार रखने को कहा, जब तक कि इस मामले में संविधान पीठ कोई अंतिम फैसला न सुना दे.

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By न्यूज़ डेस्क

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