बिहपुर सीट से बीजेपी विधायक इंजीनियर कुमार शैलेंद्र को बिहार सरकार में पथ निर्माण का मंत्री बनाया गया है। गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने पथ निर्माण के मंत्री पद की शपथ ली। माना जा रहा है कि पूर्वी बिहार में भूमिहार वोट बैंक को मजबूत करने और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के तहत बीजेपी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है। इलाके में मजबूत जनाधार और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण उन्हें सम्राट कैबिनेट में शामिल किया गया है।
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2010 में बुलो मंडल को हराकर बने थे विधायक
इंजीनियर कुमार शैलेंद्र का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उनके पिता का नाम कुमार नित्यानंद सिंह है। पेशे से इंजीनियर रहे शैलेंद्र लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और वर्ष 2010 से बिहार की सक्रिय राजनीति में प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।
उन्होंने पहली बार वर्ष 2010 में बिहपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। उस चुनाव में उन्होंने बुलो मंडल को हराकर बड़ी राजनीतिक पहचान बनाई थी। हालांकि 2015 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए सीट दोबारा अपने नाम कर ली। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार विधायक बने।

कोसी-सीमांचल और अंग क्षेत्र में मजबूत पकड़
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिहपुर और आसपास के क्षेत्रों में भूमिहार समाज के बीच इंजीनियर शैलेंद्र की मजबूत पकड़ मानी जाती है। संगठन में उनकी छवि शांत, संतुलित और प्रभावशाली नेता की रही है। स्थानीय राजनीति में उनका विरोध करने वाला कोई बड़ा चेहरा फिलहाल सक्रिय नहीं माना जाता।
उनके पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बुलो मंडल भी अब एनडीए का हिस्सा हैं, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। बीजेपी उन्हें कोसी-सीमांचल और अंग क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने वाले बड़े चेहरे के रूप में देख रही है।
साफ-सुथरी छवि के नेता
सार्वजनिक जीवन में इंजीनियर कुमार शैलेंद्र की छवि साफ-सुथरे नेता की रही है। हालांकि 2015 और 2020 के चुनावी हलफनामे में तीन आपराधिक मामलों का उल्लेख था, लेकिन वर्ष 2025 के शपथ पत्र में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं दिखाया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री बनाए जाने के बाद Bihpur समेत पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र में बीजेपी संगठन को मजबूती मिलेगी और आगामी चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ पार्टी को मिल सकता है
