पटना : रोबोट और ड्रोन से तो आप सभी परिचित होंगे. पर क्या आपको पता है कि ड्रोन और रोबोट अब न सिर्फ पिज्जा डिलिवरी और जंग के मैदान में बम बरसाने का काम कर रहे हैं बल्कि अब वह खेती करने में भी काम आ रहे हैं. यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यही सच है. बिहार में भी जल्द ही रोबोट खेती का कार्य कर करते दिखेंगे.

12वीं पास देवेश ने बनाया रोबोट : बिहार के अररिया जिले में रहने वाले 12वीं पास देवेश कुमार झा ने रोबोटिक्स और ड्रोन सिस्टम से खेती करने की पद्धति विकसित की है. देवेश ने अपनी कंपनी को अररिया में ही ‘डेबेस्ट’ नाम से रजिस्ट्रर्ड कराया है. देवेश अपनी योजना को बिहार सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं. कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा है कि बिहार के कई इलाकों में किसानों को खेती संबंधी कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थानों से मिलकर जगरूकता कार्यक्रम शुरू करेंगे.

अनाज उगाने में नहीं होगी कोई प्राब्लम

नयी तकनीक के माध्यम से खेती को ऑनलाइन किया जायेगा. खेत उंगलियों पर होगा. किसानों की फसल सीधे बाजार में पहुंच जायेगी. सैटेलाइट और अन्य उन्नत उपकरण द्वारा खेती की जीआइएस मैपिंग, सॉयल टेस्टिंग, ड्रोन द्वारा कीटनाशक छिड़काव के साथ अन्य सभी तरह का काम होगा. यह सभी सुविधा किसान को नि:शुल्क प्रदान की जायेगी. रोबोट और ड्रोन के माध्यम से बुंदेलखंड के किसानों को फायदा पहुंचा जा चुका है. तकनीक की मदद से अनाज उगाने में कोई बाधा नहीं पहुंची है. रोबोट के इस्तेमाल से हम मिट्टी की उच्च गुणवत्ता तुरंत जांच लेते हैं. इससे पता चल जाता है कि कौन सी फसल लगानी है. रोबोट खेतों में बैक्टीरिया का भी पता लगा लेता है.

ड्रोन करेगा छिड़काव

देवेश का कहना है कि अगर खेत में ड्रोन का इस्तेमाल होगा तो इसके सहारे खेत की आसानी से मॉनीटरिंग भी की जा सकती है. रोबोट खेत में लेबर वाला कार्य करेगा. इस तकनीक से समय की भी बचत होगी. रोबोट और ड्रोन के आने से बिहार में मजदूरों की कमी दूर हो जायेगी. एग्रीकल्चर में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल विदेशों में अब काफी ज्यादा हो रहा है. बिहार में भी इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद होगा.

देवेश को कई आइआइटी संस्थान दे चुका है सम्मान

देवेश 12वीं की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली चले गये. यू-ट्यूब चैनल से उन्होंने कोडिंग करना सिखा. 2014 से रोबोट और ड्रोन पर उन्होंने काम शुरू किया. इसमें उन्हें 2017 में सफलता मिली. इनकी टीम में अभिनव विवेक, जूही झा, संतोष हुलावाले, गोकुल ओझा शामिल हैं. संतोष और गोकुल सॉफ्टेवेयर के साथ-साथ रोबोट और अन्य सभी कामों में साथ दिया. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी इस तकनीक के लिए देवेश की तारीफ कर चुके हैं. इस टेक्नोलॉजी में लोकेशन सेंसर, ऑप्टीकल सेंसर, इलेक्ट्रोकैमिकल सेंसर, मेकैनिकल सेंसर व एयर फ्लो सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है.

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *