बुधवार की अलसुबह तेज आंधी-बारिश के आसार अभी बने हुए हैं। इसलिए खास तौर से किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यह स्थिति एक सप्ताह तक बनी रह सकती है।
इस दौरान मौसम साफ रहेगा, पर अचानक बादल छा जाएंगे और तेज हवा के साथ बारिश भी हो सकती है। इस साल अभी तक की यह सर्वाधिक बारिश है। यहां 46 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। कृषि विज्ञानियों ने इससे फसलों को नुकसान की बात कही है। कृषि विभाग नुकसान का आकलन कर रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के मौसम विभाग के अनुसार तापमान में दो डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। बुधवार का अधिकतम तापमान 33.04 और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। 88 प्रतिशत आद्रता के साथ हवा भी 12.04 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही है। बीएयू के मौसम विज्ञानी डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि अप्रैल-मई में ऐसा मौसम होता है। इस बार बारिश ज्यादा हुई है। मौसम अभी साफ रहेगा, लेकिन अचानक तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है।

तेज आंधी की भी संभावना, इस साल की सर्वाधिक 46 एमएम बारिश रिकार्ड, तापमान में गिरावट मौसम विभाग ने किया सतर्क
कोविड-19 महामारी के बीच मानसून को लेकर एक सुकून देने वाली खबर आई है। आगामी मानसून सीजन अल नीनो की काली छाया से मुक्त रहेगा, जिससे मानसूनी बादल बार जमकर बरसेंगे। भारतीय मौसम विभाग ने बुधवार को यह पूर्वानुमान जारी किया। मानसून सीजन के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसूनी बादल जून से लेकर सितंबर तक सक्रिय रहेंगे। इस दौरान देश में चौतरफा बारिश होगी। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि केरल के तट पर हर साल की भांति इस बार भी मानसून एक जून को दस्तक देगा और 15 अक्टूबर को लौट जाएगा।
पूर्वानुमान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि मानसून-2020 के बादलों पर अल नीनो का प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी मानसून की सामान्य चाल पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। खरीफ सीजन की खेती के लिए यह पूर्वानुमान बहुत मायने रखता है। ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए यह सुखद खबर है। मानसूनी बारिश देश में जून से लेकर सितंबर महीने के बीच होती है। मानसून के भरोसे ही भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था फलती फूलती है। इस सीजन की प्रमुख फसल धान, मोटे अनाज, तिलहन व दलहन हैं।


