घर के बजट को थोड़ा बढ़ा लीजिए, क्योंकि प्रीपेड मीटर लगते ही आपका बिजली खर्च भी बढ़ने वाला है। पहले मीटर का किराया 20 रुपए था लेकिन प्रीपेड मीटर लगते ही किराए की राशि 50 रुपए हो जाएगी। इस तरह पूरे पटना से बिजली कंपनी के बिल में हर महीने 1.53 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी।


नवगछिया न्यूज़ WhatsApp Group

शहर में बिजली मीटर बदले जा रहे हैं। डिजिटल की जगह हर घर में प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि प्रीपेड मीटर लगते ही आपका बिजली बिल भी बढ़ने वाला है। अब हर महीने का बिल 30 रुपए बढ़कर ही आएगा। कारण है यह बदलाव। ऐेसे में हर उपभोक्ता के दिल में एक ही सवाल आता है, आखिर मीटर बदले ही क्यों जाते है? जब इस सवाल का जवाब तलाशा गया तो सुविधा के अलावा एक खेल भी सामने आया। बिजली कंपनी जिस प्राइवेट कंपनी से मीटर लेती है, उसे प्रति मीटर एकमुश्त पैसा देने की बजाय हर महीने किराए के तौर पर राशि दी जाती है। डिजिटल मीटर में भी ऐसा ही हुआ और अब प्री पेड मीटर में भी ऐसा ही होगा। इस खेल में लाखों टन ई-कचरा भी निकल रहा है, जिसके निपटान के बारे में बिजली कंपनी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। कबाड़ में फेंके जा रहे डिजिटल मीटर का क्या होगा, इस सवाल का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।

आप ठगे गए और पता भी नहीं चला

बिजली कंपनी हर 3-4 साल में मीटर बदल रही है। वर्ष 2014-15 में डिजिटल मीटर लगाए गए थे। तब कंपनी का यह कहना था कि डिजिटल मीटर बिजली चोरी को रोकेंगे। उपभोक्ताओं के बिल में अचानक से 20 रुपए मीटर किराए के तौर पर जुड़ गए और उन्हें पता भी नहीं चला। सभी डिजिटल मीटर बेहतर स्थिति में काम कर रहे हैं। जब इन डिजिटल मीटर की राशि से अधिक पैसा कंपनी ने कमा लिया तो इसे कबाड़ में फेंक दिया गया। सुविधा के नाम पर फिर प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। घर में प्रीपेड मीटर लगते ही फिर 30 रुपए बिल में बढ़ जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा।

कहां जाएगा यह ई कचरा

पटना में सात हजार उपभोक्ताओं के घर में प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। अब बाकी पांच लाख 3 हजार घरों में भी जल्द ही प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। प्रीपेड मीटर लगते ही डिजिटल मीटर कबाड़ में फेंक दिए जाएंगे। इसकी शुरुआत सात हजार मीटर से हो चुकी है। इन्हें अंचल कार्यालयों में कबाड़ की तरह फेंक दिया गया है। अब यह शहर का सबसे बड़ा ई कचरा होगा। पूरे देश में सालाना 20 लाख टन ई कचरा निकलता है, जिसमें केवल 4 लाख टन कचरा ही रिसाइकिल हो पाता है। डिजिटल मीटर में लगाई गईं इलेक्ट्रॉनिक प्लेट पृथ्वी के लिए बेहद हानिकारक है। जिस तरह इन्हें कबाड़ में फेंका जा रहा है, पहली ही बरसात में यह दोबारा उपयोग के लायक नहीं बचेंगे।

सीधे सवाल

प्रीपेड मीटर की नई व्यवस्था से आपकीजेब पर हर माह चोट पड़ेगी ही। इसको लेकर पेसू के महाप्रबंधक संजय कुमार से बात की गई। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश…

प्रीपेड मीटर कब तक और कितने लगने हैं?
जून से लगाए जाएंगे। सभी उपभोक्ताओं के मीटर बदलकर प्रीपेड करना है।

उपभोक्ताओं पर खर्च कितना आएगा?
मीटर लगाने में कोई खर्च नहीं आएगा।

मीटर के मासिक किराए में क्या अंतर आएगा?
स्मार्ट मीटर का किराया 50 रुपये महीना होगा।

अभी डिजिटल मीटर का किराया कितना है?
अभी 20 रुपये हर माह देना पड़ रहा है।

नए मीटर जो लगाए जाएंगे, उनकी लागत क्या होगी?
मीटर एजेंसी लगाएगी और उसके बदले हमें महीने में किराया देना होगा।

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Kulisbet giriş
Kulisbet güncel giriş
kralbet
Dinamobet
Dinamobet
Madridbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Matbet
Matbet