बिहार में कोरोना महामारी के दौरान गुटखा और निकोटिन युक्त पान मसाला पर लगाए गए प्रतिबंध का विस्तार कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने इन पर प्रतिबंध की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया। पूर्व में लगाए गए प्रतिबंध की अवधि लॉकडाउन के दौरान 10 जून को ही समाप्त हो गई थी। ऐसे में राज्य में इनके उपभोग पर कानूनी कार्रवाई मुश्किल हो गई थी।


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फूड सेफ्टी एक्ट के तहत हुई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त ने जन स्वास्थ्य के हित में सभी तरह के गुटखा और निकोटिन या तम्बाकू युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है और इसकी अवधि बढ़ा दी गई है। फूड सेफ्टी एक्ट 2011 के रेगुलेशन 2.3.4 के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ में तम्बाकू या निकोटिन की मिलावट प्रतिबंधित है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में ही सभी राज्य सरकारों को निकोटिन युक्त पान मसाला और गुटखा के प्रतिबंध का निर्देश दिया था। इसी आलोक में ये प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य सरकार द्वारा कराए गए जांच में पिछले साल रजनीगंधा सहित विभिन्न ब्रांडों के पान मसाला के नमूनों में जहरीला निकोटिन पाया गया था।

थूकने से संक्रमण रोग बढ़ता है

बिहार में तम्बाकू नियंत्रण हेतु राज्य सरकार की सहयोगी संस्था सोसियो एकॉनॉमिक एंड एजुकेशनल सोसाइटी (सीड्स) के कार्यपालक निदेशक दीपक मिश्रा ने बताया कि गुटका और पान मसाला का सेवन मुंह के कैंसर का प्रमुख कारण है। साथ ही राज्य सरकार का यह कदम कोरोना संक्रमण की रोकथाम में भी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि राज्य के करीब 2 करोड़ लोग पान मसाला, गुटका, जर्दा, खैनी का सेवन करते हैं, जो हमारे राज्य के लिये एक गंभीर हालत पैदा कर सकते हैं।

 

 

By न्यूज़ डेस्क

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