श्मशान में चिता पर धधकती लकड़ियों से कोयला निकालकर पटना के बाजार में बेचा जा रहा है। बांसघाट के श्मशान पर जब कोई लाश जलती है, तो कुछ लोग सिर्फ इसका इंतजार करते हैं कि कब घर वाले वहां से जाएं। जैसे ही घरवाले वहां से जाते हैं, यह लोग जलती हुई चिता से लकड़ियां निकालने में जुट जाते हैं। चिता की लकड़ियां कोयला बन जाती हैं और यही कोयला बाजार में आ जाता है। शहर के कई इलाकों में इसी कोयले पर भुट्टा, लिट्टी, नॉन रोटियां सेंकी जा रही हैं। कोयले की कीमत 300 रुपये प्रति 40 किलो होती है। इसे कोई भी खरीद सकता है। इस खेल में कुछ अपराधी भी जुड़े हैं, जिनकी शह पर यह कारोबार चल रहा है। हमारे रिपोर्टर ने जान जोखिम में डालकर तीन दिन तक इस पूरे खेल का पता किया। कोयला कैसे बाजार में आ रहा है, इसका पीछा किया तो एक ऐसा सच सामने आया, जिसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे।

श्मशान घाट से शुरू हुई पड़ताल

पटना के श्मशान घाटों पर चिता की लकड़ियों से कोयले का कारोबार चल रहा है। स्मार्ट रिपोर्टर ने सभी श्मशान घाटों की पड़ताल की। बांसघाट पर लगातार तीन दिन सुबह से दोपहर तक एक जगह छिपकर उसने जो देखा वह चौंकाने वाला था। चिता की जलती लकड़ियों पर पानी डालकर उसे कोयला बनाया जा रहा था। शव के साथ आए लोगों को पता भी नहीं चलता था कि उनके जाने के बाद चिता का क्या होने वाला है। एक दो नहीं, हर चिता के साथ ऐसा ही हो रहा था। उसके बाद कोयले को बोरे में भरकर उसे गोदाम तक पहुंचाया जा रहा था।

श्मशान से पीछा करते-करते रिपोर्टर बांस घाट पर नगर निगम के एक भवन में पहुंचा। चिताओं से कोयला लाकर यहीं पर बोरियों में पैक किया जा रहा था। इन सभी का सरगना जितेंद्र नाम का एक आदमी है। रिपोर्टर ने होटल कारोबारी बनकर जितेंद्र से बात की। बातचीत में हैरतअंगेज खुलासे हुए।

’भैया, कोयला मिल जाएगा क्या?

हां, किस काम के लिए लेना है।

’राजीव नगर में मेरा एक होटल है, उसी के लिए लेना है।

मिल जाएगा, 300 रुपये बोरी का दाम लगेगा।

’कोयला तो छोटा है तंदूर भट्ठी में जलेगा?

हां-शहर के कई होटलों में यही चलता है।

’मैं तो इस धंधे में नया हूं, कौन कौन होटल वाले ले जाते हैं?

बहुत से होटल वालों को हम अपनी गाड़ी से ही सप्लाई करते हैं।

’तब तो मेरे होटल तक भी पहुंचा देंगे?

हां, आप पैसा जमा कर दीजिएगा। जितना भी चाहिए, होटल तक पहुंच जाएगा।

’लेकिन दाम कुछ कम लगाइए?

श्मशान से ही महंगा आता है। 250 रुपये में तो वहीं से मिलता है।

’तो यह चिता वाला कोयला है क्या?

हां, श्मशान से ही मंगाते हैं। इसे आप इस्तेमाल करके देखिए बहुत बचत होगी।

’आपके पास तो स्टॉक कम दिख रहा है?

रोज इतना ही आ जाता है। आप जितना चाहें उतना मिल जाएगा।

पैसा दीजिए, जहां कहेंगे वहां पहुंच जाएगा कोयला

कारोबारी बनकर रिपोर्टर ने जब कोयला गोदाम से डिलीवरी करने वाले से बात की तो एक बात और सामने आई। डिलीवरी मैन एक वैन से कोयले की सप्लाई करता है। रिपोर्टर से हुई बात में डिलीवरी मैन ने कहा कि पटना में जहां भी श्मशान का कोयला जाता है, वहां का पैसा आ जाता है और फिर माल भेज दिया जाता है। होटल वाले यहां नहीं आते। बस पैसा पहुंचा देते हैं और कोयला उनके होटल पर पहुंचा दिया जाता है।

ज्योतिष विद्वान डॉ श्रीपति त्रिपाठी के अनुसार, चिता की लकड़ी के कोयले का किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाना धार्मिक दृष्टिकोण से सही नहीं है। चिता की राख और कोयले को गंगा में विसर्जन का विधान है। अगर ऐसा नहीं किया जा रहा है तो यह धर्म के विरुद्ध है।

उदर रोग विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार के अनुसार, अगर कोयला शव के संपर्क में रहा है तो वह दूषित हो जाता है। ऐसे कोयले पर पका खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे पेट की कई बीमारियां हो सकती हैं।

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By न्यूज़ डेस्क

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