पटना। सूबे का सबसे बड़ा अस्पताल पीएमसीएच एक बार फिर अपने कुव्यवस्था के कारण सुर्खियों में है। एक तरफ जहां सरकार इसे विश्वस्तरीय बनाने की बात कहती है तो दूसरी तरफ अस्पताल में भर्ती एक बच्ची को स्ट्रेचर और अस्पतालकर्मियों की सुविधा भी ना मिल पाने के बाद ये बातें सिर्फ सरकारी जुमला ही साबित होती है।
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बताया जाता है कि पटना के ही पुनपुन इलाके की रहने वाली एक बच्ची को तबीयत खराब की शिकायत पर उसके पिता ने उसे राज्य के सबसे बेहतरीन अस्पताल में भर्ती कराया। बच्ची को आठ अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन यहां की बद्तर चिकित्सा व्यवस्था के कारण बच्ची के पिता को ना स्ट्रेचर मिला और ना ही कोई अस्पताल कर्मी। मजबूरन उसे अपनी बच्ची को गोद में उठाकर खुद ही एक वार्ड से दूसरे वार्ड शिफ्ट करना पड़ा। इस दौरान बच्ची के परिजनों को ऑक्सीजन सिलेंडर भी खुद ही ले जाना पड़ा।

PMCH को विश्वस्तरीय बनाना चाहती है सरकार
एक ओर जहां सरकार पीएमसीएच को विश्व स्तरीय अस्पताल बनाने की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देखकर खुद समझ आ जाएगा कि सरकार सिर्फ खयाली पुलाव पका रही है। बहरहाल इस मामले में अस्पताल अधीक्षक ने कैमरे पर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन कैमरा बंद होने पर उन्होंने कार्रवाई की बात कही।
अधिकारी सिर्फ कहते हैं कार्रवाई की बात
पीएमसीएच में आये दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन जब भी मामला उजागर होता है तो अधिकारी बस कार्रवाई की बात कहकर शांत हो जाते हैं। अब ऐसे में सोंचने वाली बात ये है कि सरकारी दावों के अनुसार जब बिहार के सबसे अच्छे सरकारी अस्पताल का ये हश्र है, तो फिर अलग-अलग जिलों के सरकारी अस्पतालों में कुव्यवस्था का क्या आलम होगा और वहां इलाज कराने वाले मरीजों की स्थिती क्या होगी।

