भागलपुर : शहर में एक से बढ़कर एक आकर्षक पूजा पंडाल बनाने की होड़ समिति में लगी हुई है। इसी कड़ी में बड़ी खंजरपुर दुर्गा मंदिर में इस बार करीब 10 लाख की लागत से गुजरात के कीर्ति टेंपल जैसा पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। जो मेले में श्रद्धालु नर-नारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। पूजा समिति के सचिव राकेश कुमार उर्फ बबलू बाबू ने बताया कि मंदिर प्रागंण में पूजा पंडाल को जीवंत रूप देने में मालदा के दर्जन भर कलाकार बीते आठ दिनों से जुटे हुए हैं।
देवी दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को कोई कठिनाई न हो इसका खास ख्याल रखा जा रहा है। मंदिर प्रागंण तक पहुंचने वाले हर मार्गों को झिलमिल रोशनी से सजाया जा रहा है। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए सीसी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा वांलेंटियर एवं पुलिस बल की भी तैनाती रहेगी।

बलि प्रथा का है पुराना इतिहास
इस मंदिर की स्थापना 1942 में हुई थी। तब से यहां बलि प्रथा की शुरूआत हुई थी। लेकिन 1985 में शक्ति की देवी मां दुर्गा ने यहां बलि प्रथा को बंद करा दिया था। पुन: देवी 2014 में कन्या के रुप में विराजमान हुई और फिर बलि प्रथा को शुरू करने का फरमान जारी की। बीते चार वर्षो से यहां नवमीं पूजा को बलि दी जाती है और रात में बलि का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरण किया जाता है। इसके पूर्व शाम में देवी को पुलाव, पूड़ी, सब्जी, हलुवा एवं बुंदिया का भी भोग लगाया जाता है।
भक्ति जागरण का होता है आयोजन
श्रद्धालु के मनोरंजन के लिए प्रतिवर्ष महाअष्टमी की रात्रि में भक्ति जागरण का आयोजन होता है। इस बार झारखंड के रांची से कलाकारों को बुलाया जा रहा है। बड़ी संख्या में भक्तगण अपने परिवार के साथ देवी गीतों एवं भजनों का आनंद लेते हैं।

इन पर पूजा की सफलता का है दायित्व
अध्यक्ष पवन कुमार, सचिव राकेश कुमार उर्फ बबलू बाबू, उपाध्यक्ष रंजीत यादव एवं कार्यकारिणी सदस्य नयन, नवीन, अमर, गौतम, राहुल, अनुभव, दीपक, नीतीश, चंदन, पवन, कवि लाल यादव, फूच्चो घोष, दयानंद यादव, सुबोध यादव, दिनेश एवं नंदु सहित अन्य।


