अटल बिहारी वाजपेयी, बिहार की जनसभाओं में लोगों से अक्सर कहते थे- ‘आप सब बिहारी हैं, मैं अटल बिहारी हूं।’ दरअसल, वे खुद को ‘बड़ा बिहारी’ मानते थे। इसे हर स्तर पर साबित भी किया। अपने पूरे जीवनकाल में, बिहार को खूब जिया। कवि, साहित्यकार, संगठनकर्ता, नेता से लेकर प्रधानमंत्री तक। खासियत यह कि इन तमाम स्तरों पर वे सामान्य-सरल आदमी से रहे। संबंध-संपर्क में हैसियत या पद कभी आड़े नहीं आया। बिहार में, इन सबकी ढेरों गवाही है। संस्मरणों के रूप में। इनमें कुछ खास (दिलचस्प) पेश हैं

… पोस्टकार्ड भेजकर शादी का आमंत्रणदिया… और आ गए वाजपेयी जी सुशील मोदी-तब मेरी, उनसे ऐसी पहचान नहीं थी कि मैं उनको अपने घरेलू आयोजन में बुलाऊं और वे आ जाएं। कम से कम मुझे यही लगता था। खैर, मैंने पोस्टकार्ड पर अपनी शादी का निमंत्रण उनको भेज दिया। वे आ गए। यह हमारे लिए आश्चर्य के साथ भावविभोर होने का क्षण था। बिहार का शायद ही कोई जिला होगा, जहां वे नहीं गए हों। तांगा (टमटम) पर बैठकर दौरा किया। आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान भाजपा के कुछ लोगों ने विरोध की सोची।

उन्होंने सीधे मना कर दिया। प्रदेश का शायद ही कोई जिला होगा जहां वाजपेयी जी नहीं गए हों बिहार में 7 दिनों का राजकीय शोक आज सभी सरकारी ऑफिस, कोर्ट और स्कूल बंद रहेंगे वाजपेयी के निधन पर राज्य में सात दिनों (16 अगस्त से 22 अगस्त तक) का राजकीय शोक और 17 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। गुरुवार को कैबिनेट विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। राजकीय शोक की अवधि में सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज झुका रहेगा। साथ ही राजकीय समारोह, सरकारी मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। शुक्रवार को सभी सरकारी कार्यालय के साथ-साथ सभी अदालतें, निजी व सरकारी स्कूल बंद रहेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जैसी ही अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। हवाई अड्डे से सीधे एम्स पहुंचे और वाजपेयी जी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। सीएम अभी दिल्ली में ही है और शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कर में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने वाजपेयी के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के रूप में देश ने सबसे बड़े राजनीतिक शख्सियत के साथ ही प्रखर वक्ता, कवि, लेखक, चिंतक, विचारक और करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया है।

अपने व्यक्तित्व की बदौलत राजनीतिक सीमाओं के परे थे। उनको मछली व मिठाई बहुत पसंद थी डॉ.माया शंकर (रविशंकर प्रसाद की पत्नी)-उनको खासकर मछली और मिठाई बहुत पसंद थी। हमारे घर में दो पालतू कुत्ते थे। इनके नाम दुनिया की दो बड़ी शख्सियतों के नाम पर थे। अटल जी को जानकारी हुई, तो उन्होंने आपत्ति की। तुरंत नाम बदला गया। उनका बहुत पहले से हमारे यहां आना-जाना था। मेरे श्वसुर जी ठाकुर प्रसाद उनके परम मित्रों में थे।

सिनेमा का शौक था, पटना में कई फिल्में देखीं श्रीप्रकाश नारायण सिंह (छोटे बाबू)-पिताजी (कृष्णबल्लभ प्रसाद नारायण सिंह/बऊआ जी) से उनका बड़ा पुराना संबंध था। हमारे आवास (कदमकुआं) पर कई बार आए। रहे। पिताजी, ठाकुर प्रसाद जी, अटल जी आदि शाम में गांधी मैदान में टहलने निकल जाते थे। अटल जी, सिनेमा देखने के शौकीन थे। हमारे सिनेमा हॉल (अशोक) में उन्होंने कई फिल्में देखीं। लालमुनि और ऋषिमुनि बेहद खास थे लालमुनि चौबे और ऋषिमुनि सिंह। ये दोनों, वाजपेयी के बेहद करीबियों में रहे। चौबे के बारे में आम धारणा थी कि बिहार में अटल जी सिर्फ उन्हीं के टिकट में दिलचस्पी रखते हैं। ऋषिमुनि सिंह, संघ के प्रचारक रहे। कैमूर क्षेत्र के। इस इलाके में अटल जी के आने पर साये की तरह साथ रहते थे।

खाली नारियल, माल (रुपया) कहां है? नंदकिशोर यादव-वे 1982 में पटना आए थे। हमने चंदा करके 2.82 लाख रुपया इकट्ठा किया था, उनको देने के लिए। यह एक बड़े थैले में था। हम इस थैले को गाड़ी में रखवाना चाहते थे। सो, उनको सिर्फ नारियल दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा-’खाली नारियल, माल (रुपया) कहां है?’ सभी हंस पड़े।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *