भागलपुर : पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सन्हौला प्रखंड के मदारगंज रतनपुर गांव के रतन कुमार ठाकुर को नवजात शिशु रांची से स्वस्थ होकर घर लौटा, बच्चे का रांची के रानी अस्पताल में 25 दिनों तक इलाज चला. शुक्रवार को परिजन उसे लेकर भागलपुर पहुंचे. बच्चे के स्वस्थ होने पर मदारगंज रतनपुर गांव के ग्रामीणों में काफी खुशी है, शहीद के पुत्र के जन्म के बाद सांस लेने में दिक्कत हो रही थी.
उसे इनफेक्सन भी था, पहले उसे भागलपुर में रखा गया, फिर बेहतर इलाज के लिए रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. स्थिति में सुधार होने पर उसे आइसीयू में रखा गया. स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक हो जाने पर अस्पताल से उसे डिस्चार्ज किया गया.

शुक्रवार को अपने आवास पर पहुंचे शहीद रतन के पिता रामनिरंजन ठाकुर ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज में 50 प्रतिशत की छूट दी गयी. इलाज में 50 प्रतिशत खर्च सीआरपीएफ ने की. सीआरपीएफ की ओर से काफी सहायता दी गयी. दो से तीन लोग हमेशा रहते थे.
बच्चे का हाल जानने के बाद मीडिया से मुखातिब विवेक ओबेरॉय ने बताया कि अखबार में छपी खबर से बच्चे के बारे में पता चला। इसके बाद से लगातार अस्पताल प्रबंधन और शहीद रतन ठाकुर के परिजनों से फोन कर बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे थे। अस्पताल पहुंचते ही उन्हें खुशखबरी मिली कि बच्चा पहले से काफी स्वस्थ है। चार-पांच दिनों में स्थिति में और सुधार हो जाएगा, इसके बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रतन ठाकुर के शहीद होने के बाद पूरे परिवार के लिए दुख की घड़ी थी। जिस शहीद ने हमारे लिए इतना कुछ किया, पूरे देश की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी, उस शहीद के परिवार के लिए कुछ करने की चाह थी।

यह बच्चा पूरे देश का : विवेक ने बच्चे के दादा राम निरंजन ठाकुर से कहा कि यह बच्चा हमारे परिवार का बच्चा है। यह पूरे देश का बच्चा है। ऐसे बहुत कम ही लोग होते हैं, जो अपने बेटे के शहीद होने के बाद भी पोते को सेना में भेजने का साहस और जज्बा दिखाते हैं। शहीद रतन ठाकुर के पिता ने पहले भी अपने पोते को फौज की वर्दी पहनाने की बात कही थी।
सीआरपीएफ को दी बधाई : विवेक ओबेरॉय ने सीआरपीएफ को बधाई देते हुए कहा कि अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर उसके अबतक के इलाज का खर्च सीआरपीएफ ने उठाया है। वह बधाई का पात्र है। अस्पताल प्रबंधन भी इस बच्चे के इलाज में पूरा सहयोग कर रहा है। विवेक ने कहा कि वीर जवानों के शहीद होने के बाद उनके परिवार की मदद के लिए लोग बढ़-चढ़ कर सामने आते हैं, ऐसे लोगों से प्रेरणा लेने की जरूरत है।


