भागलपुर। शिक्षा विभाग के एक फरमान ने अधिकांश शिक्षकों की नींद छीन ली है। विभाग ने स्कूल आने और जाने के समय में अनिवार्य रूप से सेल्फी भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में देर से विद्यालय आने वाले या विद्यालय से अक्सर गायब रहने वाले शिक्षक परेशान हैं। इस आदेश से जहां शिक्षक परेशान हैं, वहीं प्रधानाध्यापक खुश नजर आ रहे हैं। समय पर विद्यालय आने के सवाल पर कई बार प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के बीच झिकझिक होती थी। विभाग के एक आदेश ने प्रधानाध्यापकों की यह समस्या दूर कर दी। अब सेल्फी का नया साइड इफैक्ट दिखने लगा है। एक प्रधानाध्यापक ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा-सेल्फी के बाद शिक्षक समय पर विद्यालय तो पहुंच जा रहे हैं, लेकिन अब वे बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। कक्षा के बदले गपशप करने में समय व्यतीत करते हैं। विभागीय अधिकारी ने कहा- यह आदत भी दूर हो जाएगी।

धक्का देने पर बढ़ती है गाड़ी

बिना धक्का गाड़ी आगे नहीं बढ़ती है। यह पंक्तियां शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बिल्कुल चरितार्थ होती है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में प्री नर्सरी से 12 वीं तक की पढ़ाई एक साथ कराने का निर्णय लिया। इसके लिए आइसीडीएस (बाल विकास परियोजना) और शिक्षा विभाग को आपसी समन्वय बना कर भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को नजदीक के विद्यालय से संबंद्ध करना था। दोनों विभाग के पदाधिकारियों की बैठक भी हुई। कागज पर सहमति भी बनी। लेकिन, धरातल पर परिणाम शून्य ही रहा। अब इस मामले में जिला के बड़े हाकिम ने रिपोर्ट तलब की। बड़े हाकिम समीक्षा बैठक करने वाले भी हैं, तो शिक्षा विभाग की निंद्रा टूटी। विभागीय कर्मी रिपोर्ट तलब करने के लिए लगातार हाथ-पांव मार रहे हैं। अब प्रखंडों से रिपोर्ट नहीं आ रही है। विभाग के बाबू परेशान हैं। बैठक में ठिकरा उन पर ही नहीं फोड़ दिया जाए, इसलिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।

अति सर्वत्र वर्जयेत

संस्कृत का श्लोक है – अति सर्वत्र वर्जयेत। इसका अर्थ होता है- अति से हमेशा परहेज करना चाहिए। यह पंक्तियां जिला के एक शिक्षक नेता पर पूरी तरह से चरितार्थ हो गई। शिक्षक नेता अक्सर शिक्षा विभाग के कार्यालय में दिख जाते थे। कार्रवाई होते ही शिक्षक की पैरवी के लिए अधिकारी के पास पहुंच जाते थे। अधिकारी से लेकर बाबू तक के सामने उनके तेवर और अंदाज दोनों काफी तल्ख होते थे। लगातार शिकायती पत्र भी लिखते थे। इस बार नेताजी खुद फंस गए। जिला में विभाग के सबसे बड़े अधिकारी ने उनके ही विद्यालय का निरीक्षण कर दिया। निरीक्षण के बाद निलंबन की कार्रवाई भी कर दी। राशि रिकवरी की नोटिस भी थमा दी गई। इसके बाद से नेताजी दिख नहीं रहे हैं। कर्मी ने कहा- नेताजी दो दो स्कूल के प्रभार में थे। दोनों में निरीक्षण के दौरान अनियमितता मिली है। नेताजी ने अति कर दी, तो कार्रवाई होना ही था।

साहब गिन रहे हैं दिन

उद्योग विभाग वाले साहब दिन गिन रहे हैं। दिसंबर महीने में ही रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में साहब अब अपने प्रत्येक दिन को हर दृष्टिकोण से सार्थक करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। लगातार योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। कनीय अधिकारियों पर भी अधिक से अधिक परिणाम हासिल करने का दबाव बना रहे हैं। बातचीत के दौरान साहब अब अक्सर दार्शनिक बन जा रहे हैं। साहब ने कहा- मैं दिन गिन रहा हूं। बस यही सोच रहा हूं कि जब तक हूं, कुछ न कुछ करूं। खैर, अंतिम दिनों में भी साहब का मिजाज नहीं बदला है। अब भी वे किसी को हड़काते हैं, तो किसी पर प्यार बरसाते हैं। ऐसे कर्मी जिन्हें वे अक्सर डांट देते हैं, वे उनके विदाई का इंतजार कर रहे हैं। एक कर्मी ने कहा- दीया बुझने से पहले अधिक भभकता है। साहब भी अंतिम दिनों में कुछ ऐसा ही कर रहे हैं।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *