शारदीय नवरात्र बुधवार प्रतिपदा से शुरू हो रहे हैं। पहली पूजा से लगातार नौ दिनों तक दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना होगी। नवरात्र पर जहां पूजा की परंपरा पर आधुनिकता हावी हो रही है, वहीं बंगाली समाज अाज भी प्राचीन रीति-रिवाज को कायम रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दुर्गा पूजा पर इस बार अलग-मंदिरों के स्वरूप के दर्शन कराए जाएंगे। इस बार मां दुर्गा नौका पर आएंगी और हाथी पर सवार होकर विदा लेंगी। शहर में दुर्गापूजा पर दुर्गाबाड़ी पंडाल निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच गया है।
जानें, क्या है महालया अमावस्या
महालया पर आज अहले सुबह लोग घरों में दुर्गासप्तशती के पाठ सुनेंगे। गंगा घाटों पर गंगा स्नान करने के लिए श्रद्धालु उमड़ेंगे। इसके साथ ही पितृ पक्ष का समापन होगा। नवरात्रि से ठीक पहले जो अमावस्या आती है उसे महालया अमावस्या कहा जाता है। इसे सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। जहां पितृ पक्ष की शुरुआत होने पर पितर धरती पर आते हैं वहीं महालया अमावस्या या सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कर उन्हें धरती से विदा किया जाता है। इस बार 8 और 9 अक्टूबर दोनों दिन अमावस्या है। ऐसे में महालया भी दोनों दिन मनाया जाएगा। बता दें कि महालया बंगालियों का त्योहार है। इस दिन से मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत होती है। वहीं, इस अमावस्या के साथ ही पितृ पक्ष समाप्त हो जाता है। इस दिन ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध करने की भी परंपरा है। पंडित आनंद झा ने बताया कि 9 अक्टूबर मंगलवार को 09:10 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन से मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत होती है। इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।

आज 9.10 बजे तक रहेगी अमावस्या की तिथि, गंगा घाटों पर स्नान को उमड़ेंगे लोग
महालया का क्या है महत्व
बंगाल के लोगों के लिए महालया पर्व का विशेष महत्व है। महालया से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत मानी जाती है। यह दुर्गा पूजा की के शुरूआत का प्रतीक है। मान्यता है कि महिषासुर नाम के राक्षस के सर्वनाश के लिए महालया के दिन मां दुर्गा का आह्वान किया था। कहा जाता है कि महालया अमावस्या की सुबह सबसे पहले पितरों को विदाई दी जाती है। शाम को मां दुर्गा कैलाश पर्वत से पृथ्वी लोक आती हैं और पूरे नौ दिनों तक यहां रहकर धरतीवासियों पर कृपा का अमृत बरसाती हैं।

दुर्गाबाड़ी मशाकचक में षष्ठी से नवमी तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
दुर्गाबाड़ी मशाकचक में षष्ठी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसमें दिल्ली, कोलकाता के कलाकार शरीक होंगे। वहीं बंगाली टोला कालीबाड़ी दुर्गापूजा कमेटी के महासचिव विलास कुमार बागची ने बताया कि कालीबाड़ी में दुर्गापूजा पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। सप्तमी से नवमी तक होने वाले कार्यक्रम में सप्तमी को कोलकाता के सारेगामा गायक चंचल रॉय, रियलिटी शो के कलाकार गायिका अंकिता बनर्जी, अष्टमी को कोलकाता के प्ले बैक सिंगर सोरिश बनर्जी, भुवनेश्वर ओडिशा की फिल्म गायिकी सुष्मिता मिश्रा, 18 अक्टूबर नवमी को सिलीगुड़ी बंगाल की संस्था नित्य मंदिरम की ओर से समूह नृत्य, गीत संगीत होगी। इसके मैनेजर शिवानी देवनाथ हैं।

10 को चित्रा नक्षत्र वैघृति योग में होगी प्रतिपदा
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र वैघृति योग तुला राशि में होगी। इसके साथ ही कलश स्थापन और नवरात्र आरंभ होंगे। बूढ़ानाथ मान मंदिर के पंडित रमेश झा ने बताया कि काशी पंचांग के अनुसार बुधवार सुबह 7:56 और मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 7:51 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 से 12:23 बजे के बीच है। यह वृश्चिक राशि में पड़ रहा है। इस बार पहली पूजा से नौ दिनों तक दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग पूजा-अर्चना होगी। जो भाव से पूजा करते हैं उन्हें मां भगवती की कृपा होती है।

16 अक्टूबर को खुलेंगे मां के पट
16 अक्टूबर मंगलवार को सप्तमी का प्रवेश काशी पंचांग के अनुसार सुबह 8:54 और मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 8:48 मिनट पर होगा। इस दिन मां के पट खुलेंगे, पत्रिका प्रवेश, निशा पूजा, भगवती का आह्वान होगा। 17 अक्टूबर बुधवार को महाष्टमी का प्रवेश काशी पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर मंगलवार सुबह 10:32, मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 10:27 बजे तक है। महाष्टमी का समापन काशी पंचांग के अनुसार बुधवार 17 अक्टूबर सुबह 12:27, मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 12:22 बजे तक है। इसी दिन महाष्टमी व्रत होगा। इसके पूर्व 16 अक्टूबर मंगलवार को निशा पूजा सुबह 11:37 से दोपहर 1:55 बजे तक कर सकेंगे। 18 अक्टूबर गुरुवार को महानवमी अपराह्न 2:32 तक है। इस दिन महानवमी पूजा, त्रिशूलनी पूजा, बलि, हवन पूजन होगा। 19 अक्टूबर शुक्रवार को विजया दशमी है। इस दिन नीलकंठ दर्शन, अपराजिता पूजा, जयंती धारण, नवरात्र व्रत का पारण, देवी विसर्जन किया जाएगा।


