भागलपुर : मुस्लिम महिलाएं शिक्षा को लेकर लगातार जागरूक हो रही हैं। इनमें बच्चों को शिक्षित करने के प्रति रुझान भी बढ़ा है। ये तीन तलाक नहीं चाहती हैं न ही लड़के-लड़कियों में भेदभाव। ये बातें तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में हुए शोध में सामने आई हैं। डॉ. रश्मि प्रकाश के निर्देशन में पीएचडी कर रहीं जेबा अनवर ने कई महिलाओं से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष दिया है।

जेबा ने भागलपुर में मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक दशा पर शोध किया है। शोध में यह सामने आया कि परिवार में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की है। रहन-सहन का तरीका अब भी पारंपरिक है। 75 फीसद घरों में पुरुषों का आधिपत्य है। आर्थिक दशा ठीक करने के लिए 60 फीसद महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य के प्रति महिलाएं सचेत नहीं हैं। अधिकांश महिलाएं यूनानी दवा का इस्तेमाल कर रही हैं। झोलाछाप चिकित्सक पर भरोसा करती हैं। महिलाएं मानती है कि उन्हें भी रोजगार के लिए पहल करनी चाहिए। धार्मिक कार्यों में शामिल होना चाहिए। गरीबी मिटाने के लिए नौकरी करनी चाहिए। महिलाएं निकाह को सामाजिक संरचना मानती हैं लेकिन तीन तलाक प्रथा का विरोध करती है। यह भी कि आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में शिक्षा और रोजगार की भूमिका है। स्त्री-पुरुष के पारिश्रमिक के भुगतान में अंतर नहीं है। 20 फीसद महिलाएं बीड़ी बनाने के काम से जुड़ी हैं।

मुस्लिम महिलाओं की आबादी और स्थिति

2011 की जनगणना के अनुसार भागलपुर में मुस्लिम महिलाओं की आबादी दो लाख 56 हजार 328 है। शहरी क्षेत्र में सर्वाधिक 20 हजार जनसंख्या जगदीशपुर में है। शेष जगहों पर 10 से 20 हजार के बीच है। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक आबादी सन्हौला में 24 24 हजार 757 है। जगदीशपुर में एक हजार पुरुषों में 940 महिलाएं हैं, जबकि जिले में लिंगानुपात 913 है। 2001 से 2011 के बीच महिलाओं की जनसंख्या 26.75 फीसद बढ़ी है। सबसे अधिक वृद्धि बिहपुर में 36.75 फीसद हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर 60.8 फीसद है। अधिकांश महिलाएं मैट्रिक तक पढ़ी हैं। कार्यशील जनसंख्या 16.3 फीसद है। अधिकांश महिलाएं कृषि के अलावा दूसरे कार्य भी कर रहीं हैं। शहरी क्षेत्र में 37 फीसद महिलाएं तीन तरह के कार्यों में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल पास महिलाएं 17.24 फीसद और शहरी क्षेत्र में 17.1 फीसद हैं।

इन इलाकों में हुआ सर्वे

नारायणपुर, नवगछिया, खरीक, सन्हौला, शाहकुंड, सबौर, चमेलीचक, कबीरपुर आदि इलाकों में।

पीजी भूगोल विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ. शरतचंद्र मंडल ने कहा कि शहरी क्षेत्र के पांच वार्डों के अलावा आधा दर्जन गांवों में जाकर शोध किया गया है। शोध पत्र जमा हो गया है। शोध करने वाली छात्रा को डिग्री मिल गई है।

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By न्यूज़ डेस्क

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