खरीक : विक्रमशिला सेतु पर मरम्मतीकरण कार्य स्थल पर खरीक प्रखंड के काजी कोरिया की प्रसूता सुनीता देवी प्रसव पीड़ा से कराहती रही. सुनीता के लिए नो तो स्ट्रक्चर की व्यवस्था हो सकी. और ना ही एंबुलेंस की. प्रसव पीड़ा के दर्द से कराहती सुनीता बड़ी मुश्किल से बेबस लाचार किसी तरह 100 मीटर की लंबी दूरी पार किया. कहने को तो यह दूरी महज सौ मीटर था लेकिन प्रसव पीड़ा से करा रही सुनीता के लिए यह दूरी हजार किलोमीटर से भी ज्यादा प्रतीत हो रहा था. बड़ी मुश्किल से सुनीता के पति प्रमोद शाह और अन्य परिजन और सीता को अपना कंधा का सहारा देकर किसी तरह पुल निर्माण कार्य स्थल को पार करा कर दक्षिण की ओर आगे बढ़ रही थी.
पहली ही दिन सारी तरह की प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई. शासन की ओर से घोषणा की गई है कि दोनों तरफ एंबुलेंस लगी रहेगी बीच की दूरी स्टेचर से तय की जा सकती है गंभीर रूप से बीमार मरीज को स्ट्रेचर पर लादकर पूर्व की ओर लगे एंबुलेंस पर लादकर अविलंब अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ सुनीता दर्द से कराहती रही तमाशबीन लोग देखते रहे पुलिस प्रशासनिक पदाधिकारी भी मौजूद थे लेकिन किसी को तरस नहीं आई बेबस लाचार प्रसव पीड़िता सुनीता अपने सुध बुध खोकर किसी तरह अपने शरीर को खींचे जा रही थी. सुनीता के पति प्रमोद शाह ने बताया सर्वप्रथम हम लोग सुनीता को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खरीद में प्रसव के लिए भर्ती कराया.
खरीक पीएचसी से प्रसव पीड़िता को अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया रेफर कर दिया. नवगछिया से सुनीता को पूर्णिया और कटिहार नहीं भेज कर अनुमंडल अस्पताल से मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया. विक्रमशिला सेतु पर बैरिकेडिंग लग जाने से आम जनों को काफी कठिनाई हो रही है मरीजों की मुकम्मल इलाज के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन का स्तर से नहीं की गयी है. प्रसव पीड़िता के परिजनों ने बताया अभी भी सुनीता और उसके बच्चे की जान खतरे में हैं. कोई सुध लेने वाला नहीं है.


