गंगा नदी पर विक्रमशिला सेतु के समानांतर बनने वाले फाेरलेन पुल का काम शुरू हाेने से पहले ही बंद हाे गया। निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला ने अपना कैंप और प्लांट हटा लिया है। उसने अपने अफसर व कर्मचारियाें का भी तबादला असम कर दिया है। 32 कर्मचारी पहले ही चले गए थे। बुधवार को प्रोजेक्ट मैनेजर सहित सात कर्मी भी चले गए। अभी एजेंसी पुल निर्माण के लिए मिट्टी की जांच कर रही थी। लेकिन विभाग और एजेंसी के बीच तालमेल के अभाव में काम बंद हाे गया। एजेंसी का कहना है कि उसे अब तक वर्क ऑर्डर नहीं मिला है। काम में विभाग सहयाेग नहीं कर रहा है।
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जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय यानी माेर्थ के अफसर का कहना है कि एजेंसी टेंडर की शर्तों के हिसाब से काम नहीं करना चाहती है। एजेंसी इस मामले काे लेकर काेर्ट भी चली गई है। अब वहां से आदेश आने के बाद ही इस दिशा में पहल हाेने की संभावना है। विभाग निर्माण एजेंसी काे बदलने पर भी विचार कर सकता है। लेकिन सब कुछ काेर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा। 4 लेन पुल का ठेका एसपी सिंगला एजेंसी को मिला था।
टेंडर में बदलाव कर एसपी सिंगला को मिला था काम
पीएम पैकेज के तहत बन रहे इस पुल को बनाने की जिम्मेवारी पिछले वर्ष एलएंडटी एजेंसी को 838 करोड़ रुपए में मिली थी, पर स्पैन की लंबाई पुराने पुल की तरह 56 मीटर होने के कारण आईडब्ल्यूएआई ने निर्माण की अनुमति नहीं दी। उसके बाद एलएंडटी को 100 मीटर लंबे स्पैन वाले पुल बनाने को कहा गया तो उसने 350 करोड़ अतिरिक्त मांगे। इसके बाद केन्द्र को नए सिरे से टेंडर करना पड़ा था। इसके बाद पटना में नया गांधी सेतु बना रही रही एजेंसी एसपी सिंगला को काम मिला था।

चार साल में पुल का किया जाना था निर्माण
995 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण हाेना था। 4 साल के अंदर इससे बनाना था। 10 साल तक इसके रखरखाव की भी जवाबदेही उसी एजेंसी की थी। समानांतर फाेरलेन पुल विक्रमशिला सेतु के 50 मीटर पूरब की तरफ बनना था। निर्माण शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच की जा रही थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है। समानांतर फाेरलेन पुल के निर्माण में लगातार अड़चन आ रही है। पहले, दाे पाया के बीच की दूरी सिर्फ 50 मीटर थी, जिस कारण से अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने इस पर राेक लगा दी थी। बाद में दाे पाया के बीच की दूरी 100 मीटर की गई। इसके बाद निर्माण की अनुमति दी गई थी।
