रेलवे के अनारक्षित टिकट काउंटर से भी नकली टिकट बिक रहे हैं। खरीदने वाले यात्री टिकट के पैसे भी पूरे दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नकली टिकट थमा दिया जा रहा है। कोई भी यात्री को शायद ही आभास होगा कि उसके द्वारा काउंटर से खरीदा गया टिकट नकली हो सकता है। लेकिन रेलकर्मियों, स्टेशनों के नजदीक स्थित जनसुविधा केंद्र संचालकों की मिलीभगत से यात्रियों को धड़ल्ले चूना लगाया जा रहा है। इससे यात्री खामियाजा भुगत ही रहे हैं, दूसरी ओर रेलवे को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है।
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कोईलवर के टिकट को नई दिल्ली का बनाया : आरपीएफ और रेलवे के कॉमर्शियल विभाग ने जितेंद्र सहनी द्वारा लिए गए टिकट की जांच की। पता चला कि यह टिकट राजेंद्रनगर के काउंटर संख्या चार से सुबह में पांच बजे कोईलवर के लिए खरीदा गया था। बाद में इस टिकट पर 35 रुपये के बदले 275 रुपये प्रिंट किया गया था। कोईलवर की जगह इस पर नई दिल्ली प्रिंट किया गया। यही नहीं टिकट लेने के टाइमिंग को भी बदलने का प्रयास किया गया था, लेकिन उसमें पांच के पहले लिखा गया 1 कुछ दूरी पर प्रिंट हो गया था। आरपीएफ प्रभारी ने बताया कि बिना रेलकर्मियों की मिलीभगत के टिकटों की कालाबाजारी काउंटरों से नहीं हो सकती। दोनों मामले में यात्रियों पर तो कार्रवाई हुई, लेकिन जिस काउंटर से ये टिकट खरीदे गए उसके कर्मी पर कोई कारर्वाई रेल प्रशासन द्वारा नहीं की गई।

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी : सीनियर डीसीएम विनीत कुमार द्वारा अवैध टिकटों के खिलाफ पहले भी जोरदार अभियान चलाया गया था। इस क्रम में राजेंद्रनगर के एक बुकिंग क्लर्क की गिरफ्तारी भी छह महीने पहले हो चुकी है। पटना जंक्शन के नजदीक के दो जनसुविधा काउंटरों पर भी छापेमारी कर अवैध टिकटों को जब्त गया था। उसमें से एक को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया था।
ट्रैवल एजेंसी संचालक समेत 3 दलाल धराए
पटना। अवैध टिकट बेचने के आरोप में आरपीएफ ने एक ट्रैवल एजेंसी संचालक समेत तीन टिकट दलालों को पकड़ा है। आरपीएफ ने पहले पटना जंक्शन स्थित रिजर्वेशन काउंटर से एक टिकट दलाल को पकड़ा। उसके पास से कई जाली टिकट मिले। इसके बाद गोविंद मित्रा रोड स्थित ओम साईं टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी पर छापेमारी की गई। वहां से भी कई अनाधिकृत टिकट मिले। आरपीएफ प्रभारी वीएन कुमार ने बताया कि जंक्शन स्थित पीआरएस से पकड़ाए दलाल, ट्रेवल एजेंसी के संचालक विनोद कुमार और एजेंट सुधीर को जेल भेज दिया गया।
तारीख 8 जुलाई
दिन रविवार। शाम सवा पांच बजे का समय। संपूर्ण क्रांति एक्स्प्रेस खुलने के लिए तैयार थी। हरियाणा के यात्री लाल सिंह यादव ने राजेंद्रनगर टर्मिनल से नई दिल्ली के लिए तीन टिकट खरीदा। यह टिकट राजेंद्रनगर के टिकट काउंटर संख्या तीन से शाम साढ़े चार बजे 850 रुपये में खरीदा गया, लेकिन वह टिकट नकली था। मामले का खुलासा तब हुआ जब इस टिकट को ले जाकर टीटीई से स्लीपर टिकट बनाने का आग्रह किया। लाल सिंह ने बताया कि टीटीई ने उस टिकट को रख लिया और 2190 रुपये में स्लीपर क्लास का तीन टिकट बना दिया। लाल सिंह कहते रह गया कि यह टिकट उसने रेलवे के काउंटर संख्या तीन से ही खरीदा है लेकिन टीटीई नहीं माना। उसने जेल भेजने की धमकी देकर लाल सिंह को चुप करा दिया और दूसरा टिकट लेने के लिए बाध्य कर दिया। लाल सिंह ने इसकी लिखित शिकायत आरपीएफ और रेल प्रशासन से की है।
तारीख 15 जुलाई
दिन रविवार। शाम चार बजे। राजेंद्रनगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म दो पर टिकट जांच चल रही थी। लोग संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस पकड़ने के लिए इस प्लेटफॉर्म पर पहुंच रहे थे। प्लेटफॉर्म पर टीटीई जांच कर रहा था। इतने में एक यात्री जितेद्र सहनी को टीटीई ने पकड़ लिया। जितेंद्र के पास तीन साधारण टिकट थे। तीनों टिकट उसने राजेंद्रनगर स्टेशन के काउंटर संख्या चार से लिये थे। टीटीई ने जितेंद्र से कहा कि उसका टिकट नकली है। उसने जुर्माना भरने को कहा। जितेंद्र कहता रहा कि यह टिकट उसने रेलवे के काउंउटर से ही पूरे पैसे चुकाकर लिया है। सोमवार 16 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी हुई, तब भी उसकी बातों को किसी ने नहीं सुना। उसे और उसके दोनों साथियों को जेल भेज दिया गया। जितेंद्र सहनी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी कहा कि उसने काउंटर संख्या चार से टिकट कटाया था। इसकी पुष्टि बाद में सीसीटीवी फुटेज से भी हुई। काउंटर पर बबीता नामक क्लर्क ने टिकट बेचा था।
सस्ते को कर देते हैं महंगा
नकली टिकट बेचने का रैकेट इन दिनों शहर के सभी रेलवे स्टेशनों के आसपास सक्रिय हैं। काउंटरों के कर्मियों की मिलीभगत से उनका धंधा फल-फूल रहा है। पटना जंक्शन के एक वरीय पदाधिकारी ने बताया कि पकड़े गए टिकट को नकली की बजाय मैनुपुलेटेड कहना उचित होगा। उन्होंने बताया कि काउंटर से ही कम दूरी के सस्ते टिकट को चार जगहों पर छेड़छाड़ की जाती है। उसमें मूल्य, स्टेशन, टिकट की राशि और समय और डेट होता है। टिकट के चारों तथ्यों पर ध्यान से देखा जाए तो असली और मैनुपुलेटेड टिकट की पहचान की जा सकती है। असली टिकट के उपरोक्त चारों तथ्यों को फर्जी टिकट गिरोह के सदस्यों द्वारा मिटा दिया जाता है।
ऐसे पहचानें कौन है नकली कौन है असली टिकट
ये होगा नकली
टिकट पर अंकित अक्षरों की साइज असमान दिखेगी
कई बार स्टेशन और राशि तिरछी अंकित रहती है
तिथि की साइज भी सामान्य से बड़ी रहती है
टिकट साफ-सुथरा नहीं दिखता, अलग नजर आता है
असली टिकट
इसमें अक्षरों की साइज एक समान नजर आती है
स्टेशन और राशि साफ-साफ और सीधी रहती है
तिथि की साइज एक समान ही नजर आती है
पूरा टिकट साफ-सुथरा और स्पष्ट नजर आता है

