भागलपुर/नवगछिया: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) से संबद्ध जेपी कॉलेज, नारायणपुर के प्राचार्य डॉ. इमरान खान का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। वीडियो में प्रभारी कुलपति के संबंध में कथित आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी किए जाने के आरोप में विश्वविद्यालय ने प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। वहीं, प्राचार्य ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई साजिश करार दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार 2 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को संज्ञान में लिया गया, जिसमें जेपी कॉलेज, नारायणपुर के प्राचार्य डॉ. इमरान खान द्वारा प्रभारी कुलपति के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। मामले को गंभीर मानते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के निर्देश पर प्रभारी रजिस्ट्रार प्रो. रंजना दुबे ने शोकॉज नोटिस जारी किया।
जारी नोटिस में कहा गया है कि प्राचार्य का कथित आचरण विश्वविद्यालय की सेवा संहिता एवं प्राचार्य पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि वे नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित नहीं रहते और छात्रहित तथा प्रशासनिक कार्यों की उपेक्षा करते हैं। विश्वविद्यालय ने इन सभी बिंदुओं पर 24 घंटे के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लेते हुए आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार मामले में कड़ी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
इधर, जेपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. इमरान खान ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उनका दावा है कि कॉलेज के एक शिक्षक द्वारा साजिश के तहत विश्वविद्यालय अधिकारियों से शिकायत कराई गई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।
वायरल वीडियो के संबंध में उन्होंने कहा कि 1 जुलाई को कुछ छात्र संगठनों के बहकावे में आकर उन्होंने कुछ बातें कह दी थीं। उसी दौरान किसी ने उनका वीडियो रिकॉर्ड कर गलत मंशा से सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने इस घटना पर खेद भी व्यक्त किया है।
फिलहाल मामला विश्वविद्यालय प्रशासन के विचाराधीन है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्राचार्य अपने जवाब में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन उसके आधार पर आगे क्या निर्णय लेता है।

