नवगछिया : मौन एक साधना है मौन रहना वाणी के लिए एक तपस्या के समान है. मौन रहकर भी भगवान की आराधना की जाती है. मौन होकर निरंतर मां का नाम जगत कल्याण के लिए लेना ही मेरी साधना है. उक्त बातें श्री श्री 108 परम श्रधेय परमहंस स्वामी श्री आत्मानंद जी महाराज ने लिखित रूप से कही है. स्वामी आत्मानंद जी महाराज ने नवगछिया के लक्ष्मीपुर के समीप स्थित अपने आश्रम में शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां भगवती जगत जननी जगदंबा की आराधना कर रहे. स्वामी जी हर वर्ष माता की आराधना अलग अलग विधियों से करते रहे हैं.
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इस वर्ष वे मौन रह कर माता की आराधना कर रहे हैं. स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि जगत कल्याण के लिए माता भगवती भगवान, श्री राम की उपासना मौन रहकर कर रहे हैं. इस दौरान वह अपने आश्रम में मौन रहते हुए भी अपने भक्तों से मिल रहे हैं और उन्हें आशीर्वाद दे रहे. लिखित रूप से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र में सनातन धर्म के लोगो के लिए काफी महत्व रखता है.


शारदीय नवरात्र में भक्त मां दुर्गा, भगवान श्री राम की आराधना उपासना में लीन रहते हैं. इस दौरान भक्त अनेक प्रकार की उपासना से भगवान की आराधना करते हैं. भक्त जप, पाठ, ध्यान, योग, भजन, प्रवचन, सत्संग आदि विधि से माता की आराधना करते है. माता की आराधना करने वाले भक्तों की मां भगवती अवश्य मनोकामना पूर्ण करती है.

