नवगछिया : नवरात्रा की पूजा प्रारंभ होते ही पूरा प्रखंड भक्तिमय हो गया। चारों ओर मां शारदे की गीत गूंजने लगी। विक्रामपुर बारहमासी चतुर्भुजी दुर्गामाता के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रखंड के इस चर्चित मातारानी के मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। सन् 1720 में राजा कालेश्वर चौधरी के द्वारा गंगा तट के समीप इस मंदिर की नींव रखी गई थी।
Total Downloads: 176
गंगा कटाव के बाद सन् 1934 में इस मंदिर को भव्यता के साथ स्थापित किया गया। प्रखंड का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मातारानी की महज चार भुजाएं हैं। कहा जाता है कि पूजा में हुई किसी भूल के कारण इस परिवार के सदस्य गायब होने लगे थे। आज भी ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में प्रवेश कर कसमें नहीं खाई जाती है।
क्योंकि कसम खाने और खिलाने वाले दोनों पर विपत्ति आ जाती है। मंदिर के आचार्य संजय झा बताते हैं कि मातारानी के मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती। गुरुवार को बिहपुर थानाध्यक्ष राहुल कुमार ठाकुर ने बताया कि पूजा के दौरान विधि व्यवस्था बनाए रखने को लेकर थानाक्षेत्र में बीएनएस की धारा 126 के तहत अब तक करीब 80 और झंडापुर थानाध्यक्ष विश्वबंधु ने बताया थानाक्षेत्र में अब तक करीब 70 लोगों पर उक्त निरोधात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

