नवगछिया : शहर से सटे भवानीपुर स्थित मॉडर्न वैभव पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जयंती को समारोह पूर्वक शिक्षक दिवस के रूप में मनाया गया। स्कूल में छात्रों के द्वारा एक दिन के लिए शिक्षक बनकर पूरे कार्यशाला को विधिवत संचालित किया गया। वहीं वर्ग शिक्षक बने छात्रों ने ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी करवाया।
सभी छात्रों ने अपने शिक्षकों को उपहार भी दिए। समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाध्यापक विश्वास झा ने डॉ० कृष्णन के जीवन पर प्रकाश डाला। वहीं सभी शिक्षकों ने सफल छात्रों को पुरस्कृत भी किया। बेस्ट टीचर्स का खिताब विशाल कुमार को व बेस्ट प्रिसिंपल का खिताब सिमरन कुमारी को मिला। वहीं ड्राइंग प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार हर्षवर्धन व रेशम को मिला। कार्यक्रम को सफल बनाने में निदेशिका शिखा, सपना पांडेय, खुशी कुमारी, सौरव कुमार, आशीष कुमार आदि ने खूब सहयोग किया।
वही आवासीय ज्ञानदीप विद्यालय का प्रांगण आज ज्ञान, गुण और गरिमा से आलोकित रहा। अवसर था शिक्षक दिवस का, जब गुरु–शिष्य परंपरा की पावन स्मृति पुनः जीवंत हुई। इस अवसर पर विद्यालय में भव्य आयोजन हुआ जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साह और उल्लास से भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय दर्शन के दैदीप्यमान नक्षत्र, पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षक और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धा-सुमन अर्पित करके किया गया। डॉ. राधाकृष्णन जी का जीवन शिक्षक-धर्म का साक्षात् स्वरूप रहा, जिन्होंने कहा था कि “सच्चा शिक्षक वही है जो अपने विद्यार्थियों को सोचने के लिए प्रेरित करे।” विद्यालय के प्राचार्य इंजीनियर दीपक कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक ही वह शक्ति है जो अज्ञानता के अंधकार में दीपक बनकर प्रकाश फैलाता है। कार्यक्रम में विद्यालय संचालक पंकज कुमार, इंजीनियर राजेश कुमार, रौशन कुमार, हिंदी और संस्कृत के विद्वान शिक्षक शिव शंकर झा, अंग्रेज़ी की विदुषी नेहा कुमारी, ज्योति कुमारी, सपना कुमारी तथा आदित्य कुमार सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति से वातावरण गरिमा से भर उठा।

विद्यार्थियों ने कविताओं, भाषणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। मंच मानो ज्ञान-गंगा के प्रवाह से सराबोर हो उठा और गुरुजनों के चरणों में नमन की सुरभि से विद्यालय का वातावरण सुगंधित हो गया। कार्यक्रम का समापन कृतज्ञता-भाव से हुआ, जहाँ छात्रों ने अपने शिक्षकों को पुष्प और प्रणाम अर्पित कर यह संदेश दिया कि – “गुरु है तो जीवन है, गुरु है तो ज्ञान है, गुरु है तो मानवता का मान है।”

