देवशयनी एकादशी पर अमृत योग और ब्रह्म योग का दुर्लभ संयोग, जप-तप, दान और शिव आराधना का रहेगा विशेष महत्व
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नवगछिया: आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर शुक्रवार, 25 जुलाई से भगवान श्रीहरि विष्णु 119 दिनों के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसी के साथ सनातन परंपरा में चातुर्मास का शुभारंभ होगा, जो 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ समाप्त होगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ समेत सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव और उनके परिवार के हाथों में रहता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी अमृत योग, ब्रह्म योग और अनुराधा नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

शिवशक्ति मंदिर के पंडित अक्षय मिश्रा ने बताया कि चातुर्मास जप, तप, दान-पुण्य और साधना के लिए वर्ष का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई से भगवान शिव की विशेष आराधना का भी विशेष फल प्राप्त होगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को विष्णु सहस्रनाम का पाठ, अन्न एवं वस्त्र दान तथा सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।
उन्होंने बताया कि ऋतु परिवर्तन के कारण चातुर्मास में पाचन शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर रहती है। इसलिए इस अवधि में सात्विक भोजन करना चाहिए तथा प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और बैंगन जैसी तामसिक वस्तुओं से परहेज करना चाहिए। साथ ही संयमित दिनचर्या, ब्रह्मचर्य पालन और यथासंभव भूमि पर शयन करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
त्रिलोकधाम गोसपुर निवासी मैथिल पंडित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि पुराणों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से देवशयन का महत्व पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने बताया था कि जब सूर्य मिथुन राशि में होते हैं, तब भगवान मधुसूदन की मूर्ति का शयन कराया जाता है और इसी से चातुर्मास का प्रारंभ माना जाता है।
चातुर्मास के प्रमुख पर्व
- 25 जुलाई: देवशयनी एकादशी
- 29 जुलाई: गुरु पूर्णिमा
- 30 जुलाई: सावन माह प्रारंभ
- 28 अगस्त: रक्षाबंधन
- 4 सितंबर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- 14 सितंबर: गणेश चतुर्थी
- 11 अक्टूबर: शारदीय नवरात्र प्रारंभ
- 20 अक्टूबर: विजयादशमी (दशहरा)
- 25 अक्टूबर: शरद पूर्णिमा
- 8 नवंबर: दीपावली
- 20 नवंबर: देवोत्थान एकादशी
