2011 की जनगणना के आधार पर होगा चुनाव, अगस्त अंत तक जारी हो सकती है अधिसूचना; नई तकनीकों के साथ होगा मतदान
पटना। बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग अक्टूबर-नवंबर में 9 चरणों में मतदान कराने की योजना पर काम कर रहा है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक है, इसलिए उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कराने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि सुरक्षा बलों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। चुनाव को लेकर आयोग ने आरक्षण, परिसीमन और तकनीकी तैयारियों पर काम शुरू कर दिया है।

9 चरणों में होगा मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग के पास फिलहाल करीब 32 हजार ईवीएम उपलब्ध हैं। सीमित संख्या में मशीनें होने के कारण चुनाव 9 चरणों में कराने की तैयारी की जा रही है। प्रत्येक चरण के बाद ईवीएम का पुनः उपयोग अगले चरणों में किया जाएगा। मतदान के बाद डेटा सुरक्षित रखने के लिए मल्टी-पोस्ट ईवीएम में लगे सिक्योर डिटैचेबल मेमोरी मॉड्यूल (SDMM) का उपयोग होगा।
2011 की जनगणना बनेगी आधार
पंचायत चुनाव 2026 का आयोजन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होगा। नई जनगणना की प्रक्रिया जारी है, लेकिन उसके अंतिम आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण पुरानी जनगणना के आधार पर ही वार्ड, पंचायत समिति, जिला परिषद और मुखिया पदों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा।
अगस्त के अंत तक आ सकती है अधिसूचना
निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार पंचायत चुनाव की अधिसूचना अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े में जारी की जा सकती है। जनसंख्या आंकड़ों, परिसीमन और आरक्षण रोस्टर पर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 जून को अंतिम गजट प्रकाशित किया जाएगा।
4 हजार से अधिक पंचायतों में बदलेगा आरक्षण
इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर में बड़े बदलाव होंगे। रोटेशन प्रणाली के तहत करीब 4 हजार से अधिक पंचायतों और 55 हजार से ज्यादा वार्डों में आरक्षण बदलने की संभावना है।
राज्य में वर्तमान में 8,053 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि 2021 में इनकी संख्या 8,387 थी। शहरीकरण और नगर निकायों के विस्तार के कारण पंचायतों की संख्या में कमी आई है।
कैसे बदलेगा आरक्षण?
रोटेशन व्यवस्था के तहत जो सीटें पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग या महिला वर्ग के लिए आरक्षित थीं, वे इस बार अन्य श्रेणियों में जा सकती हैं। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण जारी रहेगा, लेकिन सीटों का आवंटन बदलेगा।
चुनाव में दिखेगी आधुनिक तकनीक
पंचायत चुनाव 2026 में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
- मल्टी-पोस्ट ईवीएम से एक ही बूथ पर विभिन्न पदों के लिए मतदान।
- बायोमेट्रिक सिस्टम से फर्जी मतदान पर रोक।
- OCR तकनीक से तेज और पारदर्शी मतगणना।
- AI आधारित ‘JARVIS’ सिस्टम से काउंटिंग सेंटर की निगरानी।
- संवेदनशील बूथों पर लाइव वेबकास्टिंग।
- नामांकन, वोटर सूची और अन्य सेवाओं के लिए डिजिटल पोर्टल की सुविधा।
चुनावी माहौल होगा गर्म
आरक्षण और परिसीमन में बदलाव के कारण हजारों पंचायतों में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों की सीटों का आरक्षण बदल सकता है, जिससे नए उम्मीदवारों के लिए अवसर बढ़ेंगे। ऐसे में पंचायत चुनाव 2026 बिहार की ग्रामीण राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

