भागलपुर–नवगछिया के बीच स्थित विक्रमशिला सेतु पर यातायात बाधित होने के दौरान यात्रियों को गंगा पार कराने के लिए प्रशासनिक निर्देश पर सेवा देने वाले नाविक आज भी अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। नाव संचालकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बावजूद उन्हें निर्धारित राशि का पूरा भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने के बाद यात्रियों की सुविधा के लिए गंगा नदी में नाव सेवा शुरू की गई थी। शुरुआती दिनों में नाव चालक यात्रियों से प्रति व्यक्ति 50 रुपये किराया वसूलते थे। बाद में बिहार सरकार के निर्देश पर इस सेवा को पूरी तरह निशुल्क कर दिया गया, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
बताया जाता है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निरीक्षण के बाद प्रशासन ने नावों का पंजीकरण कराया और व्यवस्था बनाई कि यात्रियों से किराया लेने के बजाय प्रत्येक नाव को प्रति फेरा 1500 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद नाविकों ने प्रशासन के निर्देश पर कई दिनों तक मुफ्त सेवा देकर हजारों यात्रियों को गंगा पार कराया।

हालांकि सेवा समाप्त हुए काफी समय बीत जाने के बाद भी कई नाव संचालकों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिल सका है। सहोड़ा निवासी नाव संचालक राजीव कुमार ने बताया कि अनेक नाविकों की राशि अभी तक बकाया है और भुगतान के लिए उन्हें लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
रामदियरी के राजू मांझी, मंटू मांझी और इंदल मंडल समेत बख्तियारपुर के अजय महतो और प्रकाश महतो ने भी भुगतान लंबित होने की बात कही है। नाविकों का आरोप है कि खरीक अंचल कार्यालय में जाने पर उन्हें अनुमंडल कार्यालय भेज दिया जाता है, जबकि वहां भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
बकाया भुगतान को लेकर नाविकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। नाविकों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर उनकी लंबित राशि का भुगतान कराने की मांग की है।

