नवगछिया: अनुमंडल के गोपालपुर, रंगरा, खरीक समेत कई प्रखंडों में जल संसाधन विभाग की ओर से हर वर्ष करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे कटाव निरोधी कार्य अब केवल बाढ़ से सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन परियोजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार दिया है।
निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूरों को करीब छह माह तक लगातार रोजगार मिल रहा है। वहीं शिक्षित युवाओं को मुंशी, सुपरवाइजर और अन्य प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियां मिल रही हैं। इसके अलावा पेटी ठेकेदार, मेठ (मजदूर सप्लायर), ट्रैक्टर व हाइवा संचालक तथा बालू ढुलाई से जुड़े लोगों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कटाव निरोधी कार्यों का असर स्थानीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। निर्माण स्थलों के आसपास चाय-नाश्ता, भोजन, किराना और पेयजल की दुकानों की बिक्री बढ़ गई है। ट्रैक्टर, हाइवा, जेसीबी और अन्य मशीनों के संचालन से ईंधन की खपत बढ़ी है, जबकि श्रमिकों के भोजन की व्यवस्था से स्थानीय रसोइयों और छोटे कारोबारियों को भी नियमित काम मिल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही काम मिलने से पलायन में कमी आई है। इससे स्थानीय बाजारों में नकदी का प्रवाह बढ़ा है और छोटे व्यवसायों को भी नई मजबूती मिली है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय से इस्माईलपुर–बिंद टोली तटबंध पर चल रहे कटाव निरोधी कार्यों ने कई युवाओं की जिंदगी बदल दी है। तिनटंगा करारी, बाबू टोला कमलाकुंड और बुद्धूचक के कई युवा, जो पहले मेठ के रूप में कार्य करते थे, आज स्वयं ठेकेदार बन चुके हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि कटाव निरोधी योजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन जारी रखा जाए तथा स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास के साथ-साथ क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी लगातार मजबूत होती रहे।
