गोपालपुर: गंगा नदी में कार्गो के माध्यम से हो रहे वाहन परिचालन को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में नदी पार कराने वाले वाहनों का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं रखा जा रहा है। साथ ही, आपदा काल में शुरू की गई इस वैकल्पिक सेवा के लिए अब खुली डाक (ओपन टेंडर) की प्रक्रिया अपनाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से गंगा नदी में फेरी और कार्गो सेवा का संचालन केवल शाम 5 बजे तक करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद कई कार्गो संचालकों द्वारा देर रात तक भारी वाहनों को नदी पार कराया जा रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
तिनटंगा करारी निवासी जदयू के वरिष्ठ नेता चिरंजीवी राय और भाजपा के जिला सचिव बासुकी मंडल ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी कर कुछ संचालक अधिक मुनाफे के लिए रात में भी कार्गो चला रहे हैं। उन्होंने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रतिदिन कितने ट्रक, हाइवा, ट्रैक्टर और अन्य व्यावसायिक वाहन कार्गो के माध्यम से नदी पार कराए जा रहे हैं, इसका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे राजस्व की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
गोपालपुर के पूर्व सरपंच शंभू यादव और वर्तमान मुखिया नगीना पासवान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और कार्गो परिचालन के लिए खुली टेंडर प्रक्रिया लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सेवा विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य और यातायात बाधित होने के दौरान आपातकालीन व्यवस्था के रूप में शुरू की गई थी, लेकिन अब इसका व्यावसायिक उपयोग कुछ सीमित लोगों तक सिमट गया है।
उन्होंने कहा कि यदि कार्गो परिचालन के लिए विधिवत ओपन टेंडर कराया जाए तो व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होगा और आम लोगों को भी सुरक्षित तथा निर्धारित दरों पर सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने रात में हो रहे कार्गो परिचालन पर रोक लगाने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में जल्द कदम नहीं उठाए, तो वे वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर आंदोलन शुरू करेंगे।
