स्थानीय लोगों की मांग—पहले सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करें, फिर शुरू हो पुल का पुनर्निर्माण
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नवगछिया/भागलपुर: विक्रमशिला सेतु पर बनाए गए अस्थायी बेली ब्रिज को भादो माह में बंद कर पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा के बाद सीमांचल, कोसी और भागलपुर के लाखों लोगों की चिंता बढ़ गई है। पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने 30 नवंबर तक सेतु को पूर्व स्थिति में बहाल करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन बरसात के चरम और उफनती गंगा के बीच सुरक्षित आवागमन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।
नाव के सहारे सफर को लेकर बढ़ी चिंता
गौरतलब है कि तीन मई को विक्रमशिला सेतु का एक स्लैब गंगा में गिर गया था। इसके बाद अस्थायी बेली ब्रिज बनाकर आवागमन बहाल किया गया। इस दौरान कम जलस्तर में भी नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों के बैठने, बीच धारा में इंजन खराब होने और कई बार एसडीआरएफ द्वारा यात्रियों को सुरक्षित निकालने जैसी घटनाएं सामने आई थीं। अब भादो माह में गंगा के उफान के बीच यदि बेली ब्रिज बंद होता है, तो हजारों यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने उठाई मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि वे पुल की शीघ्र मरम्मत के पक्ष में हैं, लेकिन बेली ब्रिज बंद करने से पहले सरकार और प्रशासन को सुरक्षित एवं प्रभावी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
स्थानीय लोगों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- बड़ी क्षमता वाली आधुनिक मोटरबोट का तत्काल संचालन।
- यात्रियों की संख्या के अनुरूप अतिरिक्त नावों की व्यवस्था।
- सभी घाटों पर 24 घंटे एसडीआरएफ, गोताखोर और मेडिकल टीम की तैनाती।
- प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करना।
- भीड़ नियंत्रण और समयबद्ध नाव परिचालन की व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत बेहद जरूरी है, लेकिन बरसात और बाढ़ के मौसम में किसी भी प्रकार की लापरवाही लाखों लोगों के लिए परेशानी और जोखिम का कारण बन सकती है। इसलिए सरकार को निर्माण कार्य के साथ-साथ सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था भी प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करनी चाहिए।
