राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का किया निरीक्षण, बोले- रात 12 बजे भी फोन करें, लेकिन काम नहीं रुकना चाहिए
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भागलपुर | भागलपुर में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध में हुए कटाव के बाद बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र ने कटाव स्थल का निरीक्षण कर बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगले 48 घंटे के भीतर कटाव रोकने के प्रयासों का असर दिखना चाहिए, अन्यथा संबंधित अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने बचाव कार्यों की प्रगति पर असंतोष जताते हुए कहा कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने तत्काल पर्याप्त संख्या में जियो बैग, बोल्डर और अन्य सुरक्षात्मक सामग्री उपलब्ध कराकर कटाव रोकने के निर्देश दिए।

मंत्री ने मुख्य अभियंता से दो टूक शब्दों में कहा, “दो दिन में परिणाम चाहिए। अगर काम का असर नहीं दिखा तो सस्पेंड कर देंगे। जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।” इस चेतावनी के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों में भी गंभीरता देखी गई।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि बचाव कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आने पर वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर साझा करते हुए कहा कि “जरूरत पड़े तो रात 12 बजे भी फोन कीजिए, लेकिन किसी भी सूरत में काम नहीं रुकना चाहिए।”
उन्होंने निर्देश दिया कि तटबंध के दोनों छोर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए और कटाव रोकने के लिए हर संभव तकनीकी उपाय अपनाए जाएं। मंत्री ने कहा कि फिलहाल गंगा की धारा तटबंध की ओर मुड़ गई है, जिससे खतरा बढ़ गया है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि 26 जुलाई की रात गंगा के तेज बहाव के कारण राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का लगभग 150 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया था। इसके बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया। तब से जल संसाधन विभाग युद्धस्तर पर जियो बैग, बोल्डर और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए तटबंध को सुरक्षित करने में जुटा हुआ है।
अब मंत्री की सख्त चेतावनी के बाद पूरे क्षेत्र की नजरें अगले 48 घंटे पर टिकी हैं। बचाव कार्य कितना प्रभावी साबित होता है, यह न केवल प्रशासन की कार्यशैली की परीक्षा होगी, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा अहम मुद्दा है।
